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SAVE 20261003 195345 मनुस्मृति विद्त विचार गोष्ठी में वर्ण व्यवस्था एवं नारी स्वतंत्रता पर विचार Rajasthan News Portal धर्म
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Thar पोस्ट न्यूज। शिक्षाविद् एवं समाजसेवी स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय विद्त विचार गोष्ठी के प्रथम दिन आज शास्त्रों के ज्ञाता, विषय विशेषज्ञों एवं विद्वानों के विचारों के दो सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता फरीदाबाद से पधारे आचार्य डॉक्टर निरजंनलाल मंगल ने तथा द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कन्या गुरुकुल रोजड से आई आचार्य शीतल ने की मुख्य वक्ताओं में रोजड के डॉ. दीपक आर्य, कानपुर से श्री उत्कर्ष आर्य, बीकानेर से डॉक्टर चंचल पाठक, इलाहाबाद से पधारे डॉक्टर प्रेम शंकर सिंह, बीकानेर से डॉक्टर नंदिता सिंघवी, हैदराबाद से आचार्य हरिप्रसाद आचार्य, गुरुग्राम से डॉक्टर सुरेंद्र कुमार, फलोदी से पधारे श्री केसरमल, बीकानेर से श्री नीरज श्रीवास्तव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डॉक्टर शिवलोचन शांडिल्य, हमीरपुर से आचार्य रविंद्र, आचार्य, डॉ निरंजन लाल मंगल, मनुस्मृति के एक अंक के लेखक डॉ सुरेंद्र कुमार ने मनुस्मृति पर अपने विचारों को प्रमाण सहित पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत किया। उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने अपनी शंकाओं का समाधान भी प्रश्नों के माध्यम से किया। उद्घाटन एवं परिचय से प्रारंभ हुई परिचर्चा में संतुलित एवं तथ्यात्मक रूप से प्रकट किए गए विचारों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

वक्ताओं ने मनुस्मृति के आधार पर विशेष कर वर्ण व्यवस्था एवं नारी स्वतंत्रता पर मुखर रूप से अपने विचारों को प्रकट किया। मनुस्मृति के आधार पर दंड व्यवस्था तथा झूठी गवाही एवं अपराध के संदर्भ में विवेचन की गई। प्राचीन काल में मनुस्मृति जिन सामाजिक परिस्थितियों में सामने आई उसे उस समय समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था, न्याय व्यवस्था और स्त्री-पुरुष की सामाजिक भूमिकाएं जोकि आज से बहुत अलग थी, इसलिए उस समय बनाए गए सामाजिक नियमों को वर्तमान रूप में आज लागू करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि वह आज के समाज की आवश्यकताओं और न्याय की वर्तमान समझ के अनुकूल है या नहीं। कार्यक्रम के अंत में भजन-सत्संग का भी कार्यक्रम हुआ जिसमें आर्य उत्तम जी ने मधुर भजन प्रस्तुत किए।


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