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IMG 20261005 184322 scaled उपमहापौर चुनाव : 'बाड़ा तो खुल चुका था इसलिए हारे' Rajasthan News Portal राजस्थान, बीकानेर अपडेट
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Thar पोस्ट न्यूज। बीकानेर नगर निगम में उप महापौर चुनाव का मसला अभी तक शांत नही हुआ है। कांग्रेस व बीजेपी के प्रत्याशी अपने ही पार्षदों को राडार में ले रहे है। आज कांग्रेसी पार्षद मनोज विश्नोई ने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें गुलाम मुस्तफा से किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं। आज जो मुस्तफा समाज के नाम पर इतना अर्नगल माहौल पैदा कर रहे है। क्या वे दूध के धुलें हुए है।

उनकी विधानसभा चुनाव से पहले की सोशल मीडिया की पोस्ट देखे। जिन्होंने कांग्रेस के खिलाफ कितना जहर घोला है। वो चुनाव लड़े तो कांग्रेस जीवत रहती है और हम लड़े तो कांग्रेस मर जाती है। आज वे हिन्दु-मुस्लिम की बात कर दोनों समाजों में दरार पैदा कर रहे है।

उन्होंने कहा कि अगर वे संघी विचारधारा के होते तो पिछली बार 20-20 लाख रूपये में पार्षद बिके और सुशीला कंवर को वोट दिया था। लेकिन मैनें ऐसा नहीं किया। मैं निर्दलीय होने के बाद भी कांग्रेस के साथ खड़ा रहा। विश्नोई ने राजनीतिक रोटियां सेकने के लिये समाज को न बांटने की अपील मुस्तफा से की।

कुछ सवालों के जवाब में विश्नोई ने कहा कि लड़ाई कांग्रेस में थी। फिर दोषारोपण दूसरे पर क्यों ? जब एक नाम पर अल्पसंख्यक वर्ग ही सहमत नहीं। इतना ही नहीं जावेद पडिहार,अब्दुल वाहिद, नसीम बानो के नाम पर अल्पसंख्यक समाज के पार्षद ही सहमत नहीं थे। कोई किसी का विरोध कर रहा था तो कोई कि सी का। वहीं एससी वर्ग भी इस की पैरवी की कि अनेक बार अल्पसंख्यक समाज को सभापति, महापौर, न्यास अध्यक्ष व उप महापौर जैसे पद दिये जा चुके है तो इस बार उनके समाज को मौका दिया जाना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस की आपसी कलह हार का कारण बन गई। उन्होंने कहा कि एक पार्षद नोटा को वोट देकर चला गया तो दूसरे का खारिज हो गया। जो पार्षद पांच छ:हजार वोटों को साधकर जीता है। उससे ऐसी गलती होना। यह चिंतन की बात है ना कि समाज की आड़ में दोषारोपण। उन्होंने कहा कि उपमहापौर चुनाव आने तक कांग्रेस की बाड़ाबंदी भी नहीं रहीं।

पार्षद विश्नोई ने कहा कि पार्टी के जो लोग आज समाज के नाम पर नेतागिरी कर रहे है। वो अपने ही कांग्रेसी पार्षद प्रत्याशियों को हराने में लगे थे। इतना ही नहीं कई वार्डों में अल्पसंख्यक समाज के लोग पार्टी प्रत्याशी के सामने खड़े रहे। उनको बैठाने में समाज कहां चला गया था। किसी कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ परेशानी में ये नेता कहां थे। ये पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं बल्कि 36 कोम की है। इस प्रकार बिना प्रमाण के एक दूसरे के उपर आरोप-प्रत्यारोप लगाना कांग्रेस को कमजोर करने की हरकत है।

विश्नोई ने इस बात का दावा किया है कि जो विश्वासघात की बात कर रहा है। वे कितने पाक साफ है, इसके सबूत मेरे पास है। कांग्रेस के ही नहीं भाजपा के नेताओं के सबूत में मेरे पास है। जरूरत पडऩे पर वे सभी सबूत पेश करने की क्षमता रखता हूं।


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