IMG 20260712 090520 मशहूर गायिका का निधन, 48 हज़ार से अधिक गाने का रिकॉर्ड Rajasthan News Portal खेल
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Thar पोस्ट न्यूज।एक समय मे युवाओं की खास पसंद व देश की दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी का शनिवार को मैसूर के एक निजी अस्पताल में उ7म्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया. वह 88 वर्ष की थीं. परिवार के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. अपनी बहुमुखी गायकी के लिए प्रसिद्ध एस. जानकी ने अपने छह दशक से अधिक लंबे करियर में 48,000 से अधिक गीत गाए. उन्होंने मुख्य रूप से कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में गाया, लेकिन इसके अलावा हिंदी, ओड़िया, तुलु, उर्दू, पंजाबी, बांग्ला सहित लगभग 20 भारतीय भाषाओं में फिल्मों, एल्बमों, टेलीविजन और रेडियो के लिए भी अपनी आवाज दी. बप्पी लाहिरी के अनेक फिल्मों में उन्होंने स्वर दिए।

उनकी पोती अप्सरा वैद्युला ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘अत्यंत दुख के साथ मैं अपनी प्रिय दादी और महान गायिका श्रीमती एस. जानकी के निधन की सूचना साझा कर रही हूं. उन्होंने शांतिपूर्वक इस दुनिया को अलविदा कहा. हमारे दिल में बहुत दुख है, लेकिन साथ ही हम उनके असाधारण जीवन और उनके कालजयी संगीत के माध्यम से करोड़ों लोगों को दी गई 

एस. जानकी का जन्म 23 अप्रैल 1938 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पल्लापटला गांव में हुआ था. उन्हें प्रेम से ‘‘जानकी अम्मा” कहा जाता था. उन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में 1957 की तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टु’ से अपने फिल्मी गायन करियर की शुरुआत की. हालांकि उन्होंने कई भाषाओं में गाया, लेकिन उन्होंने अपने करियर में सबसे अधिक गीत कन्नड़ भाषा में रिकॉर्ड किए. उनके पी. बी. श्रीनिवास, एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम और डॉ. राजकुमार के साथ गाए युगल गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं. शानदार संगीत करियर के दौरान एस. जानकी को चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 राज्य फिल्म पुरस्कारों के अलावा कई अन्य सम्मानों से नवाजा गया. एस जानकी के पॉपुलर हिंदी गानों में 1985 में साहब अनिल कपूर और अमृता सिंह पर फिल्माया गया गीत “यार बिना चैन कहां रे” है. 1986 में आखिरी रास्ता में अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी का “गोरी का सजन, सजन की गोरी” दिल मे हो तुम आंखों में तुम. उनके बेहतरीन हिंदी गीत बप्पी लहरी के संगीत निर्देशन में आए हैं. 

कर्नाटक सरकार ने भी उन्हें ‘राज्योत्सव प्रशस्ति’ से सम्मानित किया था. वर्ष 2013 में उन्होंने भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण को यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि इसके लिए उन्हें बहुत देर में चुना गया. जानकी का मानना था कि भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए वह देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न की हकदार थीं. वर्ष 1997 में पति वी. रामप्रसाद के निधन के बाद जानकी ने सादगी भरी और गरिमापूर्ण जीवनशैली अपना ली थी. इसके बाद वह आमतौर पर सादी सफेद या बिना रंग की साड़ियों में नजर आती थीं, जो जीवनभर उनकी पहचान बन गई. इस वर्ष 22 जनवरी को उनके पुत्र मुरली कृष्ण का भी निधन हो गया था. 


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