



Thar पोस्ट न्यूज। इस बार निकाय चुनाव केवल बीजेपी व कांग्रेस के बीच नही रहने वाला। टिकट नहीं मिलने से बड़ी संख्या में बागी भी मैदान में है। राजस्थान के 309 नगर निकायों के 10,245 वार्डों में चुनावी दंगल है। पूरे तजस्थान में 66 हजार से ज्यादा नामांकन दाखिल होने ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इसमें पार्टियों के अलावा निर्दलीय व बागी दोनों भी शामिल है। अब आज का दिन सबसे अहम हैं, क्योंकि इस दौरान पार्टी नेतृत्व की असली परीक्षा टिकट से नाराज दावेदारों और बागियों को मनाने की होगी। हालांकि मंगलवार से एक सितंबर से नामांकन वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई जो 3 सितंबर कल तक चलेगी। नामांकन के आंकड़े बताते हैं कि इस बार निकाय चुनाव में मुकाबला केवल बीजेपी और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच नहीं रहने वाला। बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोक दी है और बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है। ऐसे में नाम वापसी से पहले दोनों प्रमुख दलों ने अपने संगठन और प्रभावशाली नेताओं को बागियों की मान-मनुहार में लगा दिया है। हालांकि पहले ही दिन करीब 500 से ज्यादा लोगों ने नाम वापस लिए हैं लेकिन नामांकन की तुलना में यह संख्या बहुत कम है। इस बार चुनाव में लोग पार्टी के अलावा प्रत्याशी को भी तौल रहे है। वार्ड की समस्याओं को लेकर कौन उम्मीदवार सक्रिय है? इस पर भी नजर है। केवल चुनाव जीतकर वार्ड में सक्रिय नहीं रहने वाले व घर बैठने वालों की भी इस बार मुश्किले बढ़ सकती है। कुल मिलाकर पार्षदी के लिए राह आसान नहीं है। दोनों ही दलों बीजेपी व कांग्रेस ने बागियों को साधने के लिए अपने नेताओं को खास जिम्मेदारी सौंपी है। उनसे कहा गया है कि उनके प्रभाव वाले वार्डों में यदि पार्टी का कोई अधिकृत प्रत्याशी होने के बावजूद बागी मैदान में है तो उसे नाम वापस लेने के लिए किसी तरह मनाया जाए। इसके लिए बागियों से सीधे संपर्क शुरू हो गया है। कई जगह वरिष्ठ नेताओं के फोन पहुंचने लगे हैं ताकि वोटों का विभाजन रोका जा सके, लेकिन ऐसा होते नही दिख रहा।

