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IMG 20220717 000416 भारत : हनीमून किडनैपिंग के बढ़ते मामले, क्या है सच? Rajasthan News Portal देश
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Thar पोस्ट न्यूज नई दिल्ली। भारत मे यूरोपीय देशों की तरह हनीमून किडनेपिंग एक नया शग़ल है। मजे की बात यह कि जो राज्य देश मे सबसे पिछड़ा है वही इस मामले में सबसे अव्वल है। पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में प्रेम संबंध में इस साल पहले छह माह में शादी के लिए भागने वाले ऐसे 1870 मामले सामने आए है. ज्यादातर मामलों में लड़की, लड़के को लेकर भागी है।

बिहार में हाल के महीनों में ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ीं हैं, जिसमें लड़की के घरवाले उसके गायब होने पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करवाते हैं. लेकिन, मामला जब सुलझता है तो वह प्रेम प्रसंग से जुड़ा होता है जिसमें लड़की खुद ही अपने प्रेमी के साथ फरार हुई होती है. ऐसे प्रकरणों से पुलिस तंग-तबाह है. इन्हीं मामलों को हनीमून किडनैपिंग यानि शादी के लिए अपहरण की संज्ञा दी गई है. यह शब्द पुलिस द्वारा गढ़ा गया है जिसका उपयोग वे शादी के लिए घर से लड़के-लड़कियों के भागने वाले मामले के लिए करते थे.

समय के साथ परिदृश्य बदल रहा है, पहले लड़की को लेकर लड़का फरार होता था, अब प्रेमिका ही प्रेमी को लेकर भाग रही है. वे खुलेआम इसका एलान कर पुलिस से हड़बड़ी में लड़के के परिवार वालों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध भी कर रही हैं।

पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में प्रेम संबंध में इस साल पहले छह माह में शादी के लिए भागने वाले ऐसे 1870 मामले सामने आए. अगर प्रतिदिन के हिसाब से देखें तो औसतन ऐसे दस मामले रोजाना सामने आ रहे हैं. इस प्रकार औसतन हर ढाई घंटे में एक प्रेमी युगल घर से फरार हो रहा है. इस साल अब तक हनीमून किडनैपिंग के 2778 मामले दर्ज हो चुके हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार इस मामले में बिहार दूसरे नंबर पर है. जहां 2020 में 5308 ऐसी घटनाएं हुईं थी, वहीं 2021 में 6589 मामले सामने आए.

पुलिस बिहार का कहना है कि ‘ऐसे मामले काफी परेशान करते हैं. कभी-कभी तो विधि व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं. दूसरे राज्यों का चक्कर भी काटना पड़ता है, लेकिन जब केस सुलझता है तो मामला कुछ और ही निकलता है। जानकारी में रहे कि न केवल बिहार में बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान गुजरात सहित अन्य राज्यो में हनीमून किडनेपिंग के मामले बढ़ रहे है। इसमे लड़की के मा बाप व परिजन पुलिस में लड़के वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाते है। जब पुलिस जांच में सत्यता का पता चलता है तो चुप्पी साध लेते हैं। कई बार लडक़ी वाले मोबाइल स्वीच ऑफ कर पुलिस से संपर्क से बचने की कोशिश करते हैं।


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