ताजा खबरे
IMG 20260208 115229 पुष्करणा ओलंपिक सावे के साथ होली की रंगत, रातें हुई गुलज़ार, बीकानेर परकोटा सजा दुल्हन की तरह Rajasthan News Portal देश
Share This News

Thar पोस्ट (जितेंद्र व्यास लखावत)। रात की खामोशी को इन दिनों मांगलिक गीतों की गूंज चीरने लगी है। बीकानेर परकोटे की रातें इन दिनों गुलज़ार है। पूरा शहर एक आंगन- एक छत्त बना हुआ है। परकोटे में शायद ही कोई ऐसा चौक या गली होगी जहाँ शादी का मंडप ना सजा हो। 10 फरवरी को पुष्करणा ओलंपिक सावा है और दुल्हन की तरह सज चुका है शहर। इन दिनों केवल पुष्करणा समाज मे ही नही बल्कि अन्य समाजों में भी विवाह की धूम मची है। परकोटे के बाजारों से लेकर मोहता चौक, आचार्य चौक, बारह गुवाड़, तेलीवाड़ा, व्यासों का चौक, बड़ा बाजार, जसूसर गेट नत्थूसर गेट, हर्षों का चौक आदि से बीकानेर के कोटगेट, तोलियासर भैरूंजी की गली बाज़ार तक में बूम है। पुष्करणा सावे को लेकर न केवल समाजसेवियों बल्कि अनेक राजनेताओं व व्यापारियों ने भी खुलकर सहयोग किया है। यहां किसी एक का जिक्र क्या किया जाए। पग-पग पर मेले सा मंजर है। इस शहर के बारे में एक शायर ने कहा भी है: ‘दो दिन इस शहर में ठहर के देख सारा जहर उतर जाएगा’.. यदि आप भी इस सावे की रंगत को देखना चाहते है तो 10 को इस सावा कुंभ में चले आइए। लेकिन इसके लिए आपको पैदल चलना होगा, बारातों/परातों की वजह से जाम की स्थिति रहेगी। दरअसल इस अनूठे ओलंपिक सावे की शुरुआत सैंकड़ों वर्ष पहले हुई। पुष्करणा समाज के बौद्धिक लोगों ने चिंतन मनन करने के बाद इसकी शुरुआत की। सैकड़ों साल पहले कुछ ज्ञानी मानी लोगो का यह मानना था कि समाज मे सभी लोग धनी या रसूखदार नहीं होते। बहुत से होते है तो बहुत से नहीं भी होते। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस अति महत्वपूर्ण व्यवस्था की शुरुआत हुई। बाद में समय के साथ इसमे इजाफा हुआ। पहले यह चार साल में एक बार होता था। लेकिन अब प्रत्येक दो साल में इसका आयोजन होता है। देशभर से प्रवासी बीकानेर आते है अपने रिश्तेदारों व परिचितों के साथ समय बिताते है, इन दिनों आए हुए है। ऐसा बोला भी गया है कि- जो खा लिया: पी लिया वही आपका है शेष यही रह जाना है चाहे महल, हवेली हो या और कुछ। खैर, वैवाहिक धूम के बीच होली की रंगत भी परकोटे के माहौल में घुल रही है। शहर के वरिष्ठ कलाकार मास्टर मदन जेरी का वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमे वे परकोटे के कुंवारे लड़कों की पीड़ा को गीत के माध्यम से बयां कर रहे है। वैवाहिक आयोजनों के साथ ही परकोटे में रंगत होली तक रहेगी, रातें भी जागेगी। क्योंकि ‘होली या तो बृज की या फिर बीकानेर की”….


Share This News