





Thar पोस्ट न्यूज, बीकानेर। बीकानेर के वरिष्ठ कवि एवं कथाकार राजेंद्र जोशी की हिंदी काव्य कृति ‘एक रात धूप में’ के असमिया अनुवाद का शुक्रवार को सूचना केंद्र सभागार में लोकार्पण किया गया। डिब्रूगढ़ (असम) के शिक्षा अधिकारी एवं साहित्यकार दुर्लभ चेतिया द्वारा यह अनुवाद किया गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक एवं राजभाषा संपर्क अधिकारी डॉ. हरि शंकर आचार्य ने कहा कि साहित्य विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद की परंपरा जितनी समृद्ध होगी, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान उतना ही सुदृढ़ होगा।
मुख्य अतिथि प्रवासी राजस्थानी डिब्रूगढ़ निवासी साहित्यकार-पत्रकार ललित शर्मा ने कहा कि इस अनुवाद के माध्यम से असमिया पाठक हिंदी की इन संवेदनशील कविताओं को बेहतर ढंग से पढ़ और समझ सकेंगे। इससे दोनों भाषाओं के साहित्य के बीच आत्मीय संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।
कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने अपनी काव्य कृति की रचना-यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुर्लभ चेतिया का यह अनुवाद हिंदी और असमिया भाषाओं के बीच साहित्यिक संवाद को नई दिशा देगा। उन्होंने अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
कृति के अनुवादक दुर्लभ चेतिया लोकार्पण समारोह में डिब्रूगढ़ से
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर अनुवाद प्रकिया के संदर्भ में विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि अनुवाद कार्य में ललित शर्मा के साथ सविता केसान और सुरेश अगवाल ने सहयोग किया है।
डॉ. अजय जोशी ने कहा कि किसी भी साहित्यिक कृति का अनुवाद उसे नए पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम होता है। ऐसे प्रयास भारतीय भाषाओं के साहित्य को समृद्ध करने के साथ परस्पर समझ और संवेदना को भी विस्तार देते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व राजेन्द्र जोशी की पुस्तकों का उर्दू, अंग्रेज़ी और पंजाबी भाषा में भी अनुवाद हो चुका है।
विशिष्ट अतिथि गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि कविता का अनुवाद करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह परकाया प्रवेश के समान होता है, क्योंकि अनुवादक को मूल रचना की संवेदना, भाव और अभिव्यक्ति को दूसरी भाषा में उसी प्रभाव के साथ प्रस्तुत करना होता है। उन्होंने इस उत्कृष्ट कार्य के लिए दुर्लभ चेतिया को बधाई दी।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ चित्रकार योगेंद्र पुरोहित ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।