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IMG 20220915 WA0167 पायनियर इंस्टीट्यूट के बच्चों ने मिशाल पेश की, अन्य विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट
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Thar पोस्ट, न्यूज बीकानेर। मन में दृढ़ विश्वास हो और कुछ बनने का जूनून हो तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पायनियर के बच्चों ने। जिनकी दृढ़ इच्छा शक्ति ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया है। नीट की परीक्षा में संस्थान के तीन बच्चे ऐसे है,जिन्होंने अन्य विद्यार्थियों के लिये मिशाल पेश की है। कक्षा 11 कॉमर्स विषय से पास होने वाले संतराम गवारिया ने अथक मेहनत और लग्न 638 नंबर लाकर मिसाल कायम करते हुए अपना स्थान मेडिकल कॉलेज में सुनिश्चित किया है। संतराम बताते है कि वो चिकित्सक बनना चाहते थे,लेकिन परिवार की परिस्थितियां उसके साथ नहीं थी। पिता रानी बाजार मैं छोटी सी परचून की दुकान चलाते है। ऐसे में किसी संस्थान में जाकर पढ़ाई करने की बजाय कॉमर्स विषय का चयन कर 11 वीं पास की। किन्तु पिता के एक मित्र की प्रेरणा से पुन:विज्ञान वर्ग की ओर आकर्षित होकर पायनियर में प्रवेश लिया और यहां के शिक्षकों की बदौलत इस साल नीट की परीक्षा को उत्तीर्ण कर सपने को साकार किया। वे अपनी सफलता का श्रेय पायनियर संस्थान को और विशेषकर फिजिक्स गुरु गिरीश शर्मा सर को देते हैं इसी तरह शुभम चौधरी ने वेटरनरी के अंतिम वर्ष का अध्यापन बीच में छोड़ नीट की परीक्षा दी और सफलता हासिल की। 720 अंकों में से 631 लाने वाले शुभम बताते है कि उन्होंने 2017 में वेटरनरी में चयन के बाद भी मन में चिकित्सक बनने की ललक थी। तो 2018 में पहला प्रयास किया। किन्तु सफल नहीं हुआ,फिर कोरोना के कारण ज्यादा कुछ कर नहीं पाया। डॉक्टर किशन सुथार सर से लगातार संपर्क में रहे पिछले साल पानियर संस्थान आया तो अपनी इच्छा जाहिर की। पायोनियर के निदेशक गिरीश शर्मा सर ने सुसुप्त पड़े आत्मबल को जागृत किया और नियमित टेस्ट सीरीज और लगातार मार्गदर्शन के साथ पायनियर में अध्ययन कर मुकाम हासिल किया।
मेधावी छात्रा 11वीं क्लास में सफलता की आस छोड़ चुकी थी लेकिन गिरीश सर के दूर दृष्टि और अथक मेहनत के प्रयास से सौम्या आई पहले पायदान पर
सौम्या को पायनियर लगातार क्लास रूम प्रोग्राम से ऐसी लगन पैदा की कि आज नीट की सफलता के साथ लड़कियों के वर्ग में पहला पायदान प्राप्त किया। इसके लिये सौम्या पायनियर स्टाफ को श्रेय देती है। 720 में से 680 अब प्राप्त करने वाली सौम्या का कहना है कि गिरीश सर,एच के सुथार सर व शेखावत सर ने जिस तरह प्रेरित किया। उसी का नतीजा है कि आज वे चिकित्सक बनने के सपने को साकार कर पाई।
पीछे मूडकर न देखने का मूल मंत्र
पायनियर के तीन स्तंभों में से एक गिरीश शर्मा बताते है कि वे यहां आने वाले विद्यार्थियों को एक ही मंत्र देते है कि जीवन में जो हो गया,उसे पीछे मूडकर देखने की जरूरत नहीं। आगे बढ़े सफलता ईमानदार रहें तो सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। शर्मा ने बताया कि 2021 में लगाएं इस पौधे क ी महक कुछ ही समय में प्रदेश में फैलने लगी है। दो वर्ष के अपने शैशवकाल में 18 बच्चे नीट में चयनित हो चुके है। वहीं आईआईटी में फाउंडेशन क्लास से भी आने वाले समय में अच्छा रिजल्ट आएगा। शर्मा ने बताया कि संस्थान में श्रेष्ठ अनुभवी विषय के मर्मज्ञ मेंटर्स टीम बच्चों को मार्गदर्शन देती है जहां रेगुलर क्लासरूम सुनियोजित टेस्ट सीरीज और प्रॉपर प्रॉब्लम काउंटर के साथ आधुनिक डिजिटल बोर्ड के जरिये अध्यापन का कार्य होता है। पैनल का पूरा परिसर पूर्णत वातानुकूलित है और हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। जिसके जरिये हर एक विद्यार्थी को सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है।

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