Thar पोस्ट। सदियों से मनुष्य और सूक्ष्म जीवों के बीच संघर्ष जारी है। मनुष्य जब मजबूत हुआ है तो सूक्ष्म जीव यानि बैक्टीरिया और वायरस आदि कमजोर हुए है। पिछले कुछ दशकों में मनुष्य के आरामतलबी और लापरवाह से भरे जीवन ने सूक्ष्म जीवों को मजबूत किया है। वायरस हालांकि मृत ही होते है। यह जीवित और मृत के बीच एक योजक कड़ी है। ये सूक्ष्म जीव, प्राणियों में एक चैन बनाने में कई बार कामयाब हो जाते है। इससे जनहानि होती है। स्पष्ट है कि मनुष्य फिर से मजबूत या ताकतवर होगा तो सूक्ष्म जीव कमजोर होंगे लेकिन ये ख़त्म नहीं होंगे। नियमित व्यायाम, योग, श्रम करने और पसीना बहाने से मनुष्य मजबूत होता है, इसके लिए प्राचीन समय में गुरुकुल थे, वहां श्रम का ही बोलबाला था। हालाँकि बीकानेर में कोरोना शांत हो रहा है लेकिन ब्लैक फंगस ने बीकानेर में रोद्र रूप दिखाया है। अस्पताल में अब तक 71 रोगियों को भर्ती करना पड़ा है, जिससे दो वार्ड अब तक फुल हो गए हैं। जल्द ही तीसरे वार्ड की जरूरत महसूस की जाने लगी है। पिछले 24 घंटे में एक और रोगी में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो गई है। पीबीएम अस्पताल के सीनियर डॉक्टर गौरव गुप्ता ने बताया कि सोमवार को पांच नए ऑपरेशन किए गए हैं। इन सभी की स्थिति नियंत्रण में है और आने वाले दिनों में रोगियों की संख्या बढ़ सकती है। अस्पताल के पी और जेड वार्ड में भर्ती मरीजों में चार मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। ब्लैक फंंगस इनके दिमाग तक पहुंच गया है। ऐसे में स्थिति नियंत्रण से बाहर है। जिन रोगियों के ब्लैक फंगस नाक, कान, गला या फिर आंख तक पहुंचा है, उन्हें तो बचाया जा सकता है लेकिन दिमाग तक जाने के बाद स्थिति गंभीर हो जाती है।
हर रोज औसतन एक मरीज की मौत होती है लेकिन सोमवार को किसी की जान नहीं गई। अब तक अस्पताल में 11 रोगियों की जान जा चुकी है। ब्लैक फंगस से आमतौर पर पचास प्रतिशत मौत होती है लेकिन बीकानेर में अब तक 16 प्रतिशत रोगियों की मौत हुई है।