SAVE 20260810 223650 वेतन एवं सेवा-शर्तों में न्यायसंगत सुधार किए जाएं, आठवें वेतन आयोग अध्यक्ष से मिला शैक्षिक महासंघ Rajasthan News Portal देश
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Thar पोस्ट न्यूज, नई दिल्ली। आज अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना देसाई, सदस्य सचिव श्री पंकज जैन तथा अन्य अधिकारियों के साथ नई दिल्ली स्थित आयोग के कार्यालय में विस्तृत भेंटवार्ता की। महासंघ द्वारा देशभर से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार किए गए विस्तृत ज्ञापन के विभिन्न बिंदुओं पर आयोग के साथ चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल में महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता एवं महामंत्री प्रो. गीता भट्ट शामिल थे।

महासंघ ने कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अनुशंसाओं में महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, वास्तविक क्रय शक्ति तथा सेवा एवं सेवानिवृत्ति के दौरान आर्थिक सुरक्षा को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। फिटमेंट फैक्टर 3.6 से 3.8, वार्षिक वेतनवृद्धि 5 से 6 प्रतिशत करने तथा उच्च वेतन स्तरों में अतिरिक्त चरण जोड़कर अधिकतम वेतन सीमा बढ़ाने की मांग रखी गई। छठे वेतन आयोग की वन स्टेप अप व्यवस्था को पुनः लागू करने तथा समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत होने पर मूल वेतन में स्वतः समायोजित करने तथा मकान किराया भत्ते को न्यूनतम 40, 35 और 30 प्रतिशत करने की मांग की गई। यात्रा भत्ते को वर्तमान लागत के अनुरूप संशोधित करने तथा आधिकारिक यात्राओं का पूरा खर्च यात्रा एवं दैनिक भत्ते के माध्यम से देने का सुझाव दिया गया।

महासंघ ने व्यावसायिक विकास के लिए प्रतिवर्ष 2 लाख रुपये तक की सहायता तथा शोध के लिए विज्ञान विषयों में 15 लाख रुपये और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान में 10 लाख रुपये तक प्रारंभिक शोध सहायता की मांग रखी। डिजिटल एवं शैक्षणिक संसाधनों के लिए अलग भत्ता और अग्रिम की व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया।

गृह निर्माण अग्रिम की सीमा को वर्तमान सीमा से कम से कम चार गुना करने तथा भूमि खरीद, मकान निर्माण, तैयार मकान खरीद और नवीनीकरण को इसके दायरे में शामिल करने की मांग की गई।

अवकाश व्यवस्था में आकस्मिक अवकाश 15 दिन, विशेष आकस्मिक अवकाश अतिरिक्त 15 दिन, उपार्जित अवकाश की संचय सीमा 300 से बढ़ाकर 400 दिन तथा एक बार में अवकाश लेने की सीमा 60 से बढ़ाकर 90 दिन करने की मांग रखी गई। चिकित्सा अवकाश न्यूनतम 20 दिन पूर्ण वेतन सहित, मातृत्व अवकाश 8 माह, पितृत्व अवकाश 30 दिन तथा अभिभावक देखभाल अवकाश 60 दिन करने का सुझाव दिया गया। चाइल्ड केयर लीव की पात्र अवधि में 100 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था की मांग भी की गई।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 20 से 25 लाख रुपये तक की बिना भुगतान चिकित्सा सुविधा, एलटीसी में नकदीकरण 10 से बढ़ाकर 20 दिन प्रति यात्रा, भविष्य निधि में कर-मुक्त अंशदान की सीमा 25 लाख रुपये तथा समूह बीमा की सुरक्षा 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया।

पदोन्नति के संबंध में पूरे सेवाकाल में कम से कम चार पदोन्नतियों के अवसर सुनिश्चित करने, कृत्रिम अवरोध समाप्त करने और प्रत्येक स्तर पर पर्याप्त पद उपलब्ध कराने की मांग की गई।

सेवानिवृत्ति सुरक्षा के तहत अंतिम आहरित वेतन के 60 से 67 प्रतिशत तक सुनिश्चित पेंशन तथा लगभग 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन की मांग रखी गई। ग्रेच्युटी की सीमा 75 लाख रुपये करने तथा महंगाई भत्ते में प्रत्येक 50 प्रतिशत वृद्धि पर ग्रेच्युटी सीमा में 25 प्रतिशत स्वतः वृद्धि का प्रावधान सुझाया गया। पेंशन आंशिकीकरण की पुनर्बहाली अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 से 12 वर्ष, पेंशन के 50 प्रतिशत तक आंशिकीकरण और अवधि पूरी होने पर पूर्ण पुनर्बहाली की मांग की गई।

महासंघ ने संविदा, तदर्थ एवं अस्थायी कर्मियों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थायी नियुक्तियों को बढ़ावा देने की मांग की। साथ ही बढ़ती जीवन प्रत्याशा और अनुभवी कर्मियों की सेवाओं के बेहतर उपयोग को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने पर विचार का सुझाव दिया गया।

महासंघ ने आयोग से आग्रह किया कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग केवल वेतन संशोधन तक सीमित न रहकर वेतन, भत्ते, अग्रिम, पदोन्नति, सेवा-शर्तों, अवकाश, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभों की समग्र समीक्षा करे। साथ ही लगभग 5 वर्ष के नियमित वेतन पुनरीक्षण चक्र अथवा महंगाई से जुड़ी स्वचालित पुनरीक्षण व्यवस्था का सुझाव दिया गया, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति सुरक्षित रह सके।

महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया कि आयोग ज्ञापन में प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए ऐसी न्यायसंगत, पारदर्शी एवं आधुनिक व्यवस्था की अनुशंसा करेगा, जिससे कर्मचारियों को सेवा और सेवानिवृत्ति दोनों अवस्थाओं में सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सके।


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