

Thar पोस्ट, बीकानेर। विश्व में अब कोरोना का लैम्बडा वेरिएंट को सबसे ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में डाल दिया है। अभी तक 30 से ज्यादा देशों में लैम्बडा वेरिएंट के मामले मिले हैं। भारत सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत में अब तक सार्स-सीओवी-2 के लैम्बडा वेरिएंट का कोई मामला सामने नहीं आया है।स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा कि इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) स्वरूप पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘14 जून को डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) द्वारा पहचाना गया लैम्बडा वायरस का सातवां वेरिएंट था और 25 देशों में इसका पता चला है।’’
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के कप्पा स्वरूप के दो मामलों का पता चला है। लैम्बडा वेरिएंट, हालांकि अभी तक पूरी तरह से चिंता का वेरिएंट नहीं है, लेकिन इसके उच्च संचरण क्षमता और म्यूटेशन फीचर्स इसे संभावित ख़तरे का कारण बना रहे हैं।उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, लैम्बडा वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कम से कम 7 म्यूटेशन देखे गए हैं, जो इसे ज़्यादा संक्रामक बनाते हैं, यही वजह है कि इसे ज़्यादा घातक माना जा रहा है। वहीं, डेल्टा वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में तीन उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन हैं।










