


Thar पोस्ट न्यूज, बीकानेर। बाबा रामदेव के मेले के अवसर पर बाबा के भक्तो के सेवाकार्य हेतु भल्ला फाउंडेशन के तत्वावधान में भण्डारा-लंगर एवं पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी , ट्रस्ट के अध्यक्ष तोलाराम पेडीवाल ने बताया की शुक्रवार 11 सितम्बर को शाम सात बजे भल्ला फाउंडेशन का पहला जत्था भोजन सामग्री के साथ रवाना होगा।
भल्ला फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एवं लंगर प्रभारी सोहनलाल सेठी एवं व्यवस्थापक एडवोकेट हीरालाल हर्ष ने बताया की रामदेवरा स्थित बीकानेर यात्री धर्मशाला में शनिवार से मेला अवधि तक निशुल्क भोजन-चाय, आवास एवं चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होने बताया की फाउंडेशन के कार्यकर्ता भी मेला अवधि तक वहीं रहकर सेवा कार्य करेंगे। सेठी एवं हर्ष ने बताया की शुक्रवार को शाम सात बजे ब्रह्म बगीचा से अतिथि सेवा जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

शेखर सम्मान से राजाराम स्वर्णकार सम्मानित
चंद्रशेखर जोशी की स्मृतियों को किया गया जीवंत, साहित्य-संस्कृति और खेल में योगदान को किया याद
बीकानेर। साहित्य, संस्कृति, खेल और सामाजिक सरोकारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर समाज को जोड़ने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व स्व. चंद्रशेखर जोशी की जन्म जयंती पर सखा संगम की ओर से आयोजित समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम स्वर्णकार को शेखर सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ हरिशंकर आचार्य थे, अध्यक्षता सखा संगम के अध्यक्ष एन डी रंगा ने की तथा विशिष्ट अतिथि साहित्यकार कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी रहे।

मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य ने कहा कि स्व. चंद्रशेखर जोशी ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। साहित्य के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों और खेल प्रशासन में भी उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे व्यक्तित्वों को उनके पद या उपलब्धियों के कारण ही नहीं, बल्कि उनके व्यवहार और लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता के कारण लंबे समय तक याद रखता है।
सखा संगम के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एन. डी. रंगा ने कहा कि चंद्रशेखर जोशी विचारों से समृद्ध और स्वभाव से बेहद सरल एवं मृदुभाषी थे। वे जिस आयोजन से जुड़ते, उसमें आत्मीयता का रंग भर देते थे। सखा संगम द्वारा उनकी स्मृति में शेखर सम्मान शुरू करने का उद्देश्य उनके इन्हीं मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों को समाज में जीवित रखना है।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि स्व. चंद्रशेखर जोशी मूल रूप से उत्सवधर्मी व्यक्तित्व के धनी थे। वे मानते थे कि उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि समाज को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि शेखर सम्मान के माध्यम से सखा संगम ने उनकी इसी विरासत को आगे बढ़ाने की सार्थक पहल की है।
समीक्षक अशफाक कादरी ने सम्मानित साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार केवल रचनाकार नहीं, बल्कि साहित्यिक गतिविधियों के सक्रिय संवाहक हैं।
सम्मान ग्रहण करते हुए राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि शेखर सम्मान उनके लिए अत्यंत आत्मीय और भावनात्मक सम्मान है, क्योंकि यह उस व्यक्तित्व की स्मृति से जुड़ा है जिसने साहित्य, संस्कृति और समाज के बीच निरंतर संवाद कायम रखा।
कार्यक्रम में मुक्ति संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट हीरालाल हर्ष
ने कहा कि स्व. चंद्रशेखर जोशी ने अपने जीवनकाल में बीकानेर की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी। वे स्वयं एक उत्सव की तरह थे और जहां जाते, वहां लोगों को जोड़ने का वातावरण बन जाता था। आयोजन के दौरान सोहनलाल जोशी एवं मंजूर अली चांदवानी ने
स्व. चंद्रशेखर जोशी से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और राजाराम स्वर्णकार के साहित्यिक अवदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में नागेश्वर जोशी, मेघातिथि जोशी, शशि शेखर ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि शंशाक शेखर जोशी ने किया।
