


Thar पोस्ट न्यूज। इस बार जन्माष्ठमी पर मुंबई में दही हांडी उत्सव को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मुंबई के दादर में महिला गोविंदा पथक ने मानव पिरामिड बनाकर करीब 50 फीट ऊपर टंगी दही हांडी फोड़ दी। हांडी फूटते ही गोविंदा पथक खुशी से झूम उठा। देखने में लग रहा था कि इतनी ऊंचाई पर टंगी हांडी तक पहुंचना आसान नहीं होगा, लेकिन महिला टोली ने शानदार तालमेल दिखाया। पिरामिड बनने के बाद महज 5 मिनट के अंदर गोविंदा पथक ने दही हांडी फोड़ दी।




हांडी टूटते ही गोविंदा पथक खुशी से झूमने लगे और ‘गोविंदा रे गोपाला’ के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। बोरीवली ईस्ट में मागाठाणे दही हांडी की ओर से 85 लाख रुपये का इनाम रखा, जबकि ठाणे के स्वामी प्रतिष्ठान दही हांडी में विजेता के लिए 71 लाख रुपये घोषित किए। घाटकोपर में मनसे भव्य दही हांडी की ओर से 51 लाख रुपये का इनाम रखा गया। भारी इनाम के साथ गोविंदा पथकों का जोश भी देखने लायक रहा।
बीकानेर के श्री लक्ष्मी नाथजी परिसर में नंद के आनंद भयो
श्री लक्ष्मीनाथ जी मंदिर में “नंद के आनंद भयो”कार्यक्रम में रास-लीला ने मन मोहा, संगीत में डूबे श्रीकृष्ण भक्त।श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर विकास एवं पर्यावरण समिति, बीकानेर विकास प्राधिकरण ,राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर तथा लोट्स डेयरी के संयुक्त तत्वावधान में श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
समिति के सचिव सीताराम कच्छावा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ गौरीशंकर सोनी, खुशी पंचारिया तथा शिवानी सोनी ने श्री गणेश वंदना -जय गणेश देवा से की ।इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना वीणा जोशी के निर्देशन में श्री वीणा शिक्षण संस्थान के कलाकारों ने श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर भक्ति भावना की विशेष प्रस्तुति दी।कार्यक्रम में छोटे बच्चों द्वारा मनमोहक रास लीला एवं गोपियों की भूमिका की प्रस्तुति दी गई, वहीं बड़े बच्चों द्वारा कृष्ण वंदना पर आधारित कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
भजे ब्रिजेक मंडनम, समस्त पाप खण्डनाम
अच्युतम केशवन कृष्ण दामोदरम -कौन कहते हैं भगवान, कण कण में महारास आदि गीतों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण -राधा जी की गोपियों के साथ एक के बाद एक लीलाएं -मनोहारी नृत्य के साथ प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायिका कौशल्या रामावत मोरछड़ी लहराई रे ,राधिका गौरी से, तथा मीठे रस से भर योडी राधा रानी लागे गीतों से उपस्थित भक्त जनों को मंत्र मुक्त कर दिया ।गौरी शंकर सोनी ने -बाजे रे मुरलिया, नियाज़ हसन ने सपने में सखी देख्यो नंद गोपाल तथा बाबा रे दरबार में बाजे मार घमा घम तथा खुशी पंचारिया ने यशोमती मैया से बोले नंदलाला आदि एक से एक बढ़कर गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी ।
कार्यक्रम का समापन भगवान श्री कृष्ण के जन्म के भजनों -नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की,
लाला जनम सुन आई,यशोदा भैया दे दो बधाई ,
ब्रज में हो रही जय जयकार नंद घर लाला जायो है -से हुआ। भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर उपस्थित भक्तो ने एक दूसरे को बधाइयां दी तथा नृत्य करके खुशी जताई। कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र हर्ष तथा ज्योति प्रकाश रंगा ने किया। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि अविनाश मोदी डायरेक्टर लोटस डेयरी, विशिष्ट अतिथि उद्यमी तथा समाज सेवी रामरतन धारणिया, सुनील बोड़ा तथा गौ सेवक श्री भगवान जी अग्रवाल थे।।अतिथियों का स्वागत सीताराम कच्छावा,अशोक जसमतिया, अनिल सोनी,धीरज जैन,विनोद महात्मा,कैलाश छीम्पा, मुकेश जोशी ने किया ।
कंवरलाल पंवार,शिवप्रकाश सोनी,महेंद्र सोनी,हरीप्रकाश सोनी,घनश्याम महात्मा,अजय राठौड़
ने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग दिया ।
कंस का वध तथा भगवान की जन्म पत्रिका वाचन:-
श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी नरोत्तम जी सेवग ने बताया की श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में रात्रि 12:00 कंस का वध किया गया, तत्पश्चात कथा वाचक पंडित विजय शंकर व्यास जी द्वारा भगवान की कथा तथा भगवान की जन्म पत्री का वाचन किया गया। इसके बाद आरती हुई,तथा भक्तों को पंजीरी तथा पंचामृत का प्रसाद वितरण किय गया।
बीकानेर बना वृंदावन धाम, भक्तों ने लिया भक्ति का आनंद
बीकानेर। “हरे कृष्ण… हरे कृष्ण…” और “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयघोष से बीकानेर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही श्रद्धालुओं ने बधाई भजन गाकर एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) तथा रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स के संयुक्त तत्वावधान में वृंदावन रीजेंसी होटल में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस वर्ष आयोजन की विशेष थीम “वृंदावन धाम” रखी गई थी।
वृंदावन धाम की दिखी झलक
इस्कॉन बीकानेर के केंद्र प्रभारी श्रीमान संकर्षण प्रिय प्रभुजी ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर भक्तों द्वारा कई दिनों से विशेष तैयारियां की जा रही थीं। कार्यक्रम स्थल पर सजावट के माध्यम से वृंदावन धाम की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई।
सजावट में श्री यमुना जी, भगवान श्रीकृष्ण की माखन-मटकियां तथा वृंदावन के रमणीय स्थलों को आकर्षक रूप में दर्शाया गया। पूरे परिसर को इस प्रकार सजाया गया कि श्रद्धालुओं को बीकानेर में रहते हुए भी वृंदावन धाम में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने का अनुभव हो।
मधुर कीर्तन से शुरू हुआ भक्तिमय कार्यक्रम
इस्कॉन भक्त श्रीमान श्यामसुंदर जीवन प्रभुजी ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर शाम 5 से 6 बजे तक हरिनाम संकीर्तन एवं मधुर कीर्तन का आयोजन किया गया। कीर्तन के दौरान भक्त भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूमते नजर आए और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
इसके बाद शाम 6 से 8 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य, श्लोक उच्चारण, नाट्य प्रस्तुतियां और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चे-बच्चियां श्रीकृष्ण और राधारानी के रूप में सजकर पहुंचे। नन्हे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी बाल लीलाओं और उनके आध्यात्मिक संदेश को सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया।
पंचामृत अभिषेक रहा प्रमुख आकर्षण
इस्कॉन भक्त श्रीमान भक्तवत्सल निमाई प्रभुजी ने बताया कि शाम 8 से 10 बजे तक भगवान श्री श्री राधा-कृष्ण जी का भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति संगीत और जयघोष के बीच भगवान का विशेष पूजन किया गया।
पंचामृत अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के दर्शन किए तथा जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
श्रीकृष्ण की दिव्य कथा ने बांधा समां
पंचामृत अभिषेक के बाद रात 10 से 11 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कथा का आयोजन किया गया। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी विभिन्न लीलाओं और उनके आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डाला गया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया और उनके जीवन से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों को समझने का प्रयास किया।
आधी रात के बाद आरती और 56 भोग के हुए दर्शन
भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कथा के बाद जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान की विशेष आरती की गई। आधी रात के बाद जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास छाया, पूरा परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
इसके बाद श्रद्धालुओं को भगवान के 56 भोग के दर्शन करवाए गए। प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
आयोजकों के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य केवल जन्माष्टमी मनाना ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं और भक्ति के संदेश को समाज तक पहुंचाना भी था।
जन्माष्टमी महोत्सव की श्रृंखला में 5 सितंबर को नन्दोत्सव एवं व्यास पूजा का आयोजन किया गया।
