







Thar पोस्ट। यूरोप की यात्रा के इस पड़ाव के बाद हम ज़्यूरिक के लिए रवाना हुए। हम ज़्यूरिक पहुँचे तब तक दिन ढल चुका था। बीकानेर के इंजिनीयर श्री सुरेंद्र राय की पुत्री रश्मि राय रावत वहाँ कई वर्षों से रह रही है। रश्मि बहुमुखी प्रतिभा की धनी है और उसने स्विट्ज़रलैंड में ही डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। बचपन से ही वो दैनिक लोकमत और हमारे परिवार से लगाव रखती है। हम रश्मि से मिलने पहुँचे, उसके पति प्रेम जी से भी मुलाक़ात हुई। स्वादिष्ट खाने के साथ साथ उनसे अनेक विषयों पर चर्चा हुई। जीवनशैली, खान-पान और रोज़गार की गहमागहमी के साथ नागरिकों का अनुशासन, कला व संस्कृति आदि अनेक बातों पर उन दोनों से हमने ज्ञानार्जन किया। इस परिवार ने एक कमरे में धार्मिक आस्थाओं के साथ भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर देवी-देवताओं का एक सुंदर मंदिर बनाया हुआ था। रश्मि ने बताया कि ज़्यूरिक में रहने वाले अनेक भारतीय उनके यहाँ आते रहते हैं तथा पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन आदि में हिस्सा लेते हैं। रात होने पर हमें बीकानेर की एक ओर बेटी नव्या के घर जाना था। नव्या बीकानेर के सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय के सेवा-निवृत्त उपनिदेशक स्व श्री दिनेश चंद्र सक्सेना की पुत्री है। नव्या के पति ऋषभ भटनागर बैंकिंग से जुड़ी एक कम्पनी में कार्यरत हैं। उन्होंने बड़ी गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया। इन लोगों को स्विट्ज़रलैंड आए ज़्यादा समय नहीं हुआ था। ज़्यूरिक में उनके संगी-साथियों के साथ वे वहाँ रच-बस गए। ज़्यूरिक की रिहायश के संदर्भ में भी इन बच्चों ने सारी जानकारियाँ हासिल कर ली हैं। काफ़ी गुफ़्तगू करने के बाद हम विश्राम मुद्रा में चले गए। अगला दिन हमको ज़्यूरिक के चिड़ियाघर में दुनियाभर से इकट्ठे किए गए जीव-जंतुओं के साथ बिताना था। चंद दिनों में दोनों साथ ही चले गए। वरिष्ठ पत्रकार अशोक माथुर की कलम से जारी हर रविवार

