Share This News

Thar पोस्ट। विश्व धरोहर खजुराहों के मंदिर अपनी वास्तुकला व कामुक मूर्तियों की वजह से मुख्य पर्यटन स्थल बना हुए है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो के मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और कामुक मूर्तियों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इनका निर्माण 950 से 1050 ईस्वी के बीच चंदेल राजवंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था। यूनेस्को द्वारा 1986 में इन्हें विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित इन 85 मंदिरों का वैभव 12वीं शताब्दी तक चरम पर था। चंदेल साम्राज्य के पतन के बाद ये मंदिर घने जंगलों और खजूर के पेड़ों के बीच छिप गए
प्राकृतिक बचाव: अपनी भौगोलिक अलगाव और घने जंगलों में छिपे होने के कारण, ये मंदिर बाहरी आक्रमणकारियों और तोड़-फोड़ से सुरक्षित बच गए
पुनः खोज: 1838 में, जब कैप्टन बर्ट ने स्थानीय ग्रामीणों से जानकारी प्राप्त कर इन जंगलों के बीच प्रवेश किया, तो दुनिया के सामने इस प्राचीन और भव्य मंदिर परिसर की अद्भुत कलाकृतियाँ दोबारा उजागर हुईं

  • निर्माण काल: खजुराहो के मंदिरों का अधिकांश निर्माण चंदेल शासकों, विशेषकर यशोवर्मन और धंगदेव के शासनकाल के दौरान लगभग 100 वर्षों के अंतराल में हुआ।
  • मूल नाम: प्राचीन काल में इस स्थान को ‘खजूर वाहक’ या ‘खजूरपुरा’ कहा जाता था, क्योंकि यहाँ खजूर के पेड़ों का बाहुल्य था।
  • कुल मंदिर: 12वीं शताब्दी तक यहाँ लगभग 85 मंदिर मौजूद थे, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं और आक्रमणों के कारण अब केवल 20-25 मंदिर ही शेष बचे हैं।
  • पुनर्खोज: सदियों तक गुमनाम और जंगलों में छिपे रहने के बाद, 19वीं सदी में (1838 ई.) ब्रिटिश इंजीनियर टी.एस. बर्ट (T.S. Burt) ने इन्हें दुनिया के सामने उजागर किया।

ये मंदिर मुख्य रूप से ‘नागर शैली’ और पंचायतन शैली में बलुआ पत्थर से बनाए गए हैं। इन्हें मुख्य रूप से तीन भौगोलिक समूहों में विभाजित किया गया है:

  1. पश्चिमी समूह (Western Group): यह सबसे बड़ा समूह है और यहाँ के मंदिर भगवान शिव और विष्णु को समर्पित हैं। यहाँ का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध मंदिर कंदरिया महादेव मंदिर है। अन्य प्रमुख मंदिरों में लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर और मतंगेश्वर मंदिर शामिल हैं।
  2. पूर्वी समूह (Eastern Group): इस समूह में मुख्य रूप से प्राचीन जैन मंदिर आते हैं। पार्श्वनाथ, आदिनाथ और घंटाई मंदिर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  3. दक्षिणी समूह (Southern Group): मुख्य बस्ती से थोड़ी दूर स्थित इस समूह में दूल्हादेव और चतुर्भुज मंदिर शामिल हैं।

कामुक सेक्स मूर्तियों का रहस्य

खजुराहो के मंदिरों की बाहरी दीवारों पर उकेरी गई कामुक (कामुकता) मूर्तियां अत्यधिक ध्यान आकर्षित करती हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से दो अवधारणाएं प्रचलित हैं:

  • दार्शनिक दृष्टिकोण: भारतीय धर्म और दर्शन के चार स्तंभों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का यह हिस्सा हैं। मान्यता है कि सांसारिक मोह-माया और वासना को मंदिर के बाहर ही छोड़कर व्यक्ति को भीतर शुद्ध आध्यात्मिक अवस्था (मोक्ष) में प्रवेश करना चाहिए।
  • तांत्रिक मान्यता: कुछ विद्वानों के अनुसार, यह मूर्तियां तांत्रिक साधना और विश्वासों का प्रतीक हैं।

Share This News