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IMG 20250821 WA0034 14 वीं तवांग तीर्थ-यात्रा 19 से 25 नवंबर तक Rajasthan News Portal पर्यटन
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Thar पोस्ट न्यूज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक माननीय डॉ. इन्द्रेश कुमार जी के मार्गदर्शन में संचालित मंच तिब्बत की आजादी, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति, हिमालय की रक्षा, पर्यवरण की सुरक्षा एवं अन्य सम-सामयिक मुद्दों को लेकर अनवरत 26 वर्षों से कार्य कर रहा है| मंच अपनी सक्रियता, कार्यक्रमों एवं जन- जागरण के माध्यम से नित नई उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ता जा रहा है| तवांग तीर्थ-यात्रा को माननीय डॉ. इन्द्रेश जी ने वर्ष 2012 में प्रारम्भ किया था| इस वर्ष यात्रा 19 से 25 नवम्बर तक आयोजित होगी| इस बार आयोजित होने वाली 14 वीं तवांग तीर्थ-यात्रा नया इतिहास रचने के लिए तैयार है|तवांग तीर्थ-यात्रा के सम्बन्ध में भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री एवं तवांग तीर्थ यात्रा समिति के संयोजक श्री पंकज गोयल जी का कहना है कि यह कोई सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक विशेष यात्रा है| इस यात्रा में भारत की आत्मा रची-बसी हुई है| यह यात्रा राजनैतिक, आर्थिक सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, राष्ट्रीय एकता- अखंडता, सनातन बौद्ध समन्वय एवं देशभक्ति से ओतप्रोत है या यूँ कहें कि समग्र दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है| इस यात्रा के माध्यम से संपूर्ण भारत के लोगों को पूर्वोत्तर भारत को जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त होता है|

जिस अरुणाचल प्रदेश को चीन अपना बताता है, उस प्रदेश के अंतिम जिले तवांग में बुमला बॉर्डर पर तवांग तीर्थ यात्री जाते हैं और वहां पहुँच कर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर भारत माँ यानी भारत भूमि का पूजन एवं वंदन करते हैं|

श्री पंकज गोयल का कहना है कि बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है| तवांग तीर्थ-यात्रियों के स्वागत- सम्मान में पूर्वोत्तर भारत के लोग अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं| तवांग तीर्थ -यात्रियों को ब्रह्मपुत्र नदी के टापू पर बना विश्व का एक मात्र शिव जी का मन्दिर, तेजपुर का महादेव मन्दिर, भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध जी का अग्निगढ़ मन्दिर, चित्रलेखा उद्यान, अरुणाचल का प्रवेश द्वार ‘भालूक पोंग’, पश्चिम कामेंग जिले का मुख्यालय ‘बोमडिला’, सैनिक जसवंत सिंह की स्मृति में बना जसवंतगढ़, भारत – चीन युद्ध में हुए शहीदों के शहीद स्मारक, छठे दलाई लामा जी की जन्मस्थली ‘तवांग मठ’, दलाई लामा जी के पद चिन्ह, गुरु नानक देव जी की तपस्या स्थली भूमि पर बना ‘नानक लामा’; शहीद जोगिन्दर बाबा का स्मारक सहित अन्य ऐतिहासिक स्थानों को देखने, जानने एवं समझने का मौका मिलता है|

श्री पंकज गोयल जी का कहना है कि यदि तवांग तीर्थ- यात्रा का निष्पक्ष रूप से विश्लेषण किया जाये तो बिना किसी लाग – लपेट के कहा जा सकता है कि इस यात्रा का उदेश्य बेहद पवित्र है|

मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि प्रत्येक भारतवासी को सूर्य की धरती के रूप में सुविख्यात अरुणाचल प्रदेश के बुमला बॉर्डर तक की यात्रा एक बार जरूर करनी चाहिए| इससे पूरे राष्ट्र को जानने एवं समझने का भरपूर अवसर मिलेगा lभारत तिब्बत सहयोग मंच, प्रचार विभाग


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