Thar पोस्ट। रुक्टा राष्ट्रीय के महामंत्री डॉ सुशील कुमार बिस्सु ने उच्च शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि सत्र 2020-21 में खोले गये 37 नवीन महाविद्यालयों को चलाने के लिए सरकार को इन्हें मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर सोसाइटी द्वारा संचालित नहीं किया जाना चाहिए। डॉ बिस्सू ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि मेडिकल कॉलेज की प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग 7.5 लाख रुपये होती है, जिससे मेडिकल कॉलेज का संचालन सम्भव है, किन्तु अधिकांश नवीन 37 राजकीय महाविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गये हैं, जिनमें प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग एक हजार रुपये होती है। जमीनी हालात यह हैं कि यह एक हजार रुपये भी अनेक विद्यार्थी वहन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में फीस वृद्धि का तो प्रश्न ही नहीं उठता, फिर ये सोसाइटी द्वारा कैसे संचालित हो सकेंगे?डॉ बिस्सू ने राज्य की उच्च शिक्षा के हालात पर उच्च शिक्षामंत्री को लिखा है कि वर्तमान में सामान्य उच्च शिक्षा के लगभग 300 महाविद्यालय राज्य सरकार द्वारा शासित हैं, जिनमें आधे से अधिक में प्राचार्य के पद, सभी महाविद्यालयों में प्रोफेसर के पद, अधिकांश महाविद्यालयों में लाइब्रेरियन व पीटीआई के पद तथा सभी महाविद्यालयों में मिलाकर लगभग 3000 शिक्षकों के पद रिक्त हैं । इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी के कारण इन महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता है।महाविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया इतनी धीमी है कि राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से जितने शिक्षकों की नियुक्ति होती है, उससे ज्यादा पद रिक्त हो जाते हैं। ऐसे में यदि इन 37 राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों व प्राचार्य पदों पर नियुक्तियाँ सोसाइटी बना कर की जाती हैं तो पता नहीं कितने वर्षों में यह प्रक्रिया पूर्ण होगी। गत सत्र में किसी तरह की कोई वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से ये महाविद्यालय प्राचार्य एवम शिक्षकविहीन रहे हैं, जिसके कारण यहाँ प्रवेशित विद्यार्थी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।रुक्टा राष्ट्रीय के प्रदेश अध्यक्ष डॉ दीपक शर्मा ने कहा है कि नवीन 37 राजकीय महाविद्यालयों का संचालन सोसाइटी के अधीन करने से ना तो इन महाविद्यालयों
के संचालन की समुचित वित्तीय व्यवस्था संभव होगी और ना ही ये महाविद्यालय UGC मापदंडो को पूरा कर पाएंगे। यदि राज्य सरकार 2020-2021 में खोले गए नए 37 राजकीय महाविद्यालयों का संचालन सोसाइटी के अधीन करने का निर्णय लेती है, तो यह राज्य में उच्च शिक्षा को पतन की ओर ले जाने वाला निर्णय होगा, जिसका संगठन विरोध करता है एवम इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करता है | उन्होंने आशा प्रकट की है कि इस संबंध में सकारात्मक कार्रवाई की जाकर राज्य की उच्चशिक्षा एवं उसके हितधारकों के पक्ष में निर्णय लिया जाएगा।