


Thar पोस्ट(जितेंद्र व्यास)। बीकानेर में इस बार किसी भी दल के लिए महापौर की डगर आसान नही है। अपना अपना बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस व भाजपा ने ताकत झोंक दी है। चुनाव के चलते बीकानेर में आज मुख्यमंत्री का शो भी है। इस बार करीब एक दर्जन निर्दलीय व बागी भी चुनाव में डटे हुए है। और कई वार्डों में मुख्य दलों के उम्मीदवारों को सीधी चुनोती दे रहे है। जिनमें वार्ड 2 में शिवशंकर बिस्सा, वार्ड 73 में आनंद जोशी आदि नाम है जिन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला, लेकिन वे बागी के तौर पर चुनाव लड़ रहे है। टिकट नही मिलने से वार्ड 52 में निशा पारीक भी निर्दलीय के रूप में मैदान में है। ये केवल कुछ नाम है। दरअसल, इस चुनाव में जातिवाद, रिश्तेदारी और जान पहचान एक बड़े फैक्टर के रूप में उभरे हैं। हालांकि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इसे अच्छा नही कहा जा सकता है, लेकिन यह चल रहा है। यह ध्यान रहे कि निकाय चुनाव में हार जीत का अंतर कम वोटों में सिमटता है। जीत या हार भले ही एक मत से हो वह जीत या हार ही काउंट होगी। इस बार मतदाता पार्टीयों के बैनर के साथ ही प्रत्याशियो के ‘कैलिबर’ को भी तौल रहे है। सामान्य समस्याओं से परेशान मतदाता इस बार उम्मीदवार के बारे में गहराई से विचार कर रहे है। यही वजह है कि एक दर्जन से अधिक निर्दलीय के साथ बागी ताल ठोक चुके है। जो आने वाले दिनों में महापौर के सिंहासन तक पहुंचाने के लिए मुख्य पार्टियों के लिए विशेष भूमिका में रहेंगे।

