







Thar पोस्ट न्यूज (जितेंद्र व्यास)। निकाय चुनाव से पहले ही भाजपा व कांग्रेस के भीतरखाने में टिकट वितरण को लेकर तनातनी मची हुई है। भाजपा व कांग्रेस के शीर्ष नेता व मंत्री भी इससे परेशान है और किसी तरह ”डैमेज कंट्रोल’ का प्रयास कर रहे है। नेताओं को ‘डबल’ मोर्चों पर कार्य करना पड़ रहा है। एक टिकट वितरण तो दूसरा पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना। इस रस्साकशी के खेल में टिकटों की फाइनल सूची बाहर नही आ सकी है। संभावित सूची के दम पर ही कार्यकर्ता सड़कों पर है। यदि ऐन वक्त पर टिकट बदलता है तो कार्यकर्ता की नाराजगी भी सड़कों पर दिखेगी, ऐसी संभावना है। बात भाजपा खेमे की। पिछले 24 घंटे में टिकट वितरण को लेकर कुछ वार्डो में नाराजगी प्रदर्शन किए जा रहे है । बीजेपी शहर अध्यक्ष पर रिश्तेदारों को टिकट देने की बात की पैरवी करने के आरोप लग रहे है। पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी इसका खुलकर विरोध कर रहे है। अनेक कार्यकर्ताओं ने तो पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के घर पहुंचकर विरोध जताया है। वही पार्टी से टिकट नही मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात भी कुछ कार्यकर्ता कह रहे है। टिकटों को लेकर जयपुर में मुख्यमंत्री के समक्ष हाई लेवल की मीटिंगे हो चुकी है, लेकिन प्रत्याशी रूपी तीर अभी तरकश में ही कैद है।

दूसरी और कांग्रेस नेताओ ने कार्यकर्ताओं के इस तरीके के बगावती अंदाज को भांपते हुए ‘गुप्त गुप्त” की नीति अपनाकर सीधे प्रत्याशी को चुपचाप टिकट देने की नीति अपना ली है। टिकट लो और जनसंपर्क करो। टिकट वितरण मामले में राजस्थान का कांग्रेस शीर्ष भी परेशान है। हाल ही में बीकानेर में हुई एक कांफ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष समय से पहले पहुंच गए जबकि दो प्रमुख नेता कांफ्रेंस समाप्ति से ठीक पहले पहुंचकर सफाई दी कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट है। बीकानेर में भी पार्टी के शहर अध्यक्ष व पूर्व मंत्रियों को कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। रालोपा व आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक कर मैदान में है।
