Thar पोस्ट। सुपर अलनीनो की चेतावनी से सभी देश परेशान है। यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) द्वारा जून 2026 में जारी किए गए ताजा वेदर मॉडल अपडेट्स ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है. इस अंतरराष्ट्रीय मॉडल के अनुसार, प्रशांत महासागर में एक ऐसे महा-विनाशकारी ‘सुपर अल-नीनो’ की सुगबुगाहट देखी जा रही है, जो आधुनिक सैटेलाइट युग के इतिहास में अब तक का सबसे एक्सट्रीम और शक्तिशाली अल-नीनो साबित हो सकता है. अनुमानित इसका ग्राफ इस कदर ऊपर जा रहा है कि यह पूर्व के सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर सकता है. साल 2026 के बाद के महीनो तक प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से +3°C से +4°C तक ऊपर जा सकता है.
यह एक ऐसी डरावनी स्थिति है जिसकी कल्पना भी आज से पहले कभी नहीं की गई थी.भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि भारतीय कृषि और देश की पूरी अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर करती है. ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो अल-नीनो और भारतीय मॉनसून के बीच एक बहुत ही कड़वा और सीधा संबंध रहा है. यदि देर से ही सही, लेकिन 2026 के बाद के महीनों में यह सुपर अल-नीनो पूरी तरह सक्रिय होता है, तो इसके भारतीय मॉनसून पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं…
आमतौर पर अल-नीनो का सबसे घातक असर मॉनसून के उत्तरार्ध यानी अगस्त और सितंबर के महीनों में देखने को मिलता है. यदि जून के ये अनुमान सच होते हैं, तो मॉनसून कमजोर हो जाएगा, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और यूपी में बारिश में भारी कमी आ सकती है. देश को एक भीषण सूखे का सामना कर सकता है. सुपर अल-नीनो’ का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक वेदर मॉडल यह दिखा रहे हैं कि इस बार प्रशांत महासागर की गर्मी के सामने अटलांटिक महासागर की गर्मी बिल्कुल फीकी पड़ जाएगी. इस भारी तापमान के अंतर के कारण वायुमंडल में अत्यधिक तेज हवाएं पैदा होंगी.
ये हवाएं अटलांटिक महासागर में उठने वाले खतरनाक तूफानों और हरिकेन को पनपने से पहले ही छिन्न-भिन्न कर देगा, जिससे वहां चक्रवातों की संख्या भले ही कम हो जाए, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह हिंसक हो जाएगा.
एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण एशिया के देशों में पानी की बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मचेगा और जंगलों में भीषण आग भड़क उठेगी. दूसरी तरफ, दक्षिण अमेरिका के देशों (जैसे पेरू, इक्वाडोर और ब्राजील के कुछ हिस्सों) तथा अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में मूसलाधार बारिश और विनाशकारी बाढ़ देखने को मिलेगी. इस कारण वैश्विक स्तर पर कॉफी, चीनी, कोको और पाम ऑयल जैसी कमोडिटीज की सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है.