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SAVE 20260416 215309 आखातीज 2 , जनाना व मर्दाना पतंगों की अठखेलियाँ Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट। ऊंट, मिठाई, स्त्री, सोनो गहनों शाह, पाँच चीज पृथिवी सिरे वाह बीकाणा वाह बीकाणा। बीकानेर के जीवन की यह तासीर है। यहां के ऊँट, मिठाई, स्त्री, आभूषण व भामाशाह जग प्रसिद्ध है। बीकानेर की अपनी अलग कला संस्कृति है। आखातीज के यहां अपने खास मायने है। बीकानेर में पहले आर्थिक हालात खराब थे। लेकिन लोगों का उत्साह आसमान पर था। इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि बीकानेर में वह दौर भी था तब बुजुर्ग महिलाएं अपने युवा बच्चो पर ताना कसते हुए कहती थी कि-‘घर मे नहीं अखत रा बीज और बेटा खेले आखातीज’। हालांकि हालात बदल चुके है। हालांकि आखातीज की यह कहावत आज भी अनेक अवसरों पर सुनने को मिल जाती है। विषय पर आते है बीकानेर के लोग छत्तों पर है। सांझ ढलने पर ही नीचे उतरते है। बीकानेर में जितना अनूठा यह पर्व है उतनी ही दिलचस्प पतंगबाजी है। यहां एक बात खासतौर पर कहना चाहूंगा कि बीकानेर के दूर तक फैले मिट्टी के धोरों पर वर्षभर पतंगबाजी होती है हालांकि केवल पतंगबाज़ ही वहां पहुंचते है। यहां सदियों पुरानी परंपरा का आज भी निर्वहन होता है। यहां पतंगों के भी नाम भी मर्दानगी व जनाना नाम है। इनमें कुछ नाम है जैसे- तिग्गा, फ़रियल, माथल, गिलासल, जीभल, डण्डल आदि। इसी तरह जनाना पतंगों में पूँछल, किन्नी, परी, लालती, कालती आदि नाम शामिल है। हालांकि मर्दाना परंगो का ही अधिक बोलबाला रहता है।


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