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IMG 20260418 175333 आखातीज : छत्तों पर सिमटेगा शहर! परंपरागत देशी घी का खीचड़ा/इमली रस की महकार व आकाश में गूंजेगा शोर, दो दिन बीकानेर में अब 'महाउत्सव' Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट (जितेंद्र व्यास)। अलबेले बीकानेर में आखातीज का अपना एक अलग रस- एक आनंद है। बीकानेर के लिए यह एक महाउत्सव की तरह है। नज़ारा देखने लायक होता है जब तेज गर्मी में बीकानेर के लोग पतंग डोर लिए घर की छत्तों पर पहुंच जाते है। तेज गानों के साथ बोई-काटया का स्वर गूंजने लगता है। मां करणी की इस धरा पर हज़ारों परिवार जिसमे बच्चे बुजुर्ग, महिलाएं उत्साह के साथ पतंगबाजी महोत्सव का हिस्सा बनते है। हालांकि पतंगबाजी देश के अनेक राज्यो में होती है, लेकिन वहां देशी घी के खींचडे, बड़ी फली काचरा की सब्जी व इमली के शर्बत के महकार नहीं होती। बीकानेर की स्थापना के साथ ही अक्षय तृतीया का पर्व ऐतिहासिक है। सैंकड़ों सालों से यह सिलसिला चला आ रहा है। परकोटे में तो क्या नज़ारे होते है। देखने लायक होता है। बीकानेर ने आधुनिक समय से लेकर एक ऐसा समय भी देखा है जब यहां आर्थिक हालात लोगों के ठीक नहीं हुआ करते थे, लेकिन आखातीज के प्रति उत्साह तब भी कम नही था। इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है यह वह दौर था तब बुजुर्ग महिलाएं अपने युवा बच्चो पर ताना कसते हुए कहती थी कि-‘घर मे नहीं अखत रा बीज और बेटा खेले आखातीज’। हालांकि हालात बदल चुके है। अब उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग महंगे पतंग डोर बेचने आते है। वही बीकानेर में भी खरीदारों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अव ”लूटमार’ में नहीं बल्कि लोग व्यापक स्तर पर पतंगबाजी के साथ आतिशबाज़ी कर बीकानेर की स्थापना व आखातीज का जश्न मनाने लगे है। ऐतिहासिक स्थलों पर जिला प्रशासन द्वारा व्यपक रोशनी की जाती है। पतंगबाजी के साथ साथ अबूझ सावा होने के कारण लोग शादी समारोह में भी शामिल होते है। क्रमश : जारी…


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