Thar पोस्ट, न्यूज। ताजमहल का निर्माण एक दिन में नहीं हुआ था। संसाधन सीमित थे और वर्षों तक निर्माण होता रहा। ताजमहल से जुड़े फरमान बीकानेर स्थित राजस्थान राज्य अभिलेखागार में मौजूद है। निर्माण से जुड़े कुल 5 फरमान जारी किए गए थे। इसमे 3 फरमान बीकानेर व दो फरमान जयपुर राजपरिवार के पास है। ताजमहल की जमीन अवाप्ति के बदले में कुल पांच हवेलियां दी गई थी। इस बारे में जारी 18 दिसंबर 1633 के चौथे व पांचवें फरमान में चार मकानों का ब्यौरा है, जो मिर्जा राजा जयसिंह को ताजमहल के लिए दी गई जमीन के बदले दिए गए थे। इनमें राजा भगवानदास की हवेली, माधव सिंह की हवेली, रूप जी की हवेली, स्वरूप सिंह के पुत्र चांद सिंह की हवेली शामिल है। ताजमहल के निर्माण का जिक्र अनेक अंग्रेज लेखकों ने अपनी पुस्तकों में भी किया है। अनेक शोध भी प्रकाशित हुए हैं। ताजमहल का निर्माण आमेर महाराजा मान सिंह प्रथम की आगरा स्थित मान हवेली पर बना है। इसके साथ ही ताजमहल को बनाने वाले शिल्पकार, कारीगर,मजदूर और मकराना से संगमरमर भेजने की व्यवस्था भी मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम ने की थी। शाहजहां की बेगम मुमताज महल उर्फ अरजूमंद बानो बेगम का 6 जून 1631 को निधन होने के बाद बादशाह ने बेगम की याद में ताजमहल का निर्माण करने की योजना बनाई थी। इतिहास के अनुसार मान सिंह प्रथम की यमुना किनारे बनी मान हवेली उनके वंशज मिर्जा राजा जय सिंह प्रथम के अधिकार में हुआ करती थी। विख्यात शिल्पकारों ने इस जगह को ताजमहल के लिए उपयुक्त स्थान माना। वहां यमुना नदी का घुमाव है। शाहजहां के समकालीन दो इतिहासकारों अब्दुल हमीद लाहौरी और मुहम्मद सालिह कम्बो की ताजमहल निर्माण से संबंधित कृतियों का डॉ. रामनाथ आदि इतिहास के प्रोफेसरों ने अपने निष्कर्ष में लिखा है कि यह जमीन मूल रूप से आमेर के राजा मानसिंह की थी। इतिहासकार लिखते हैं कि ताजमहल मूल रूप से एक राजपूत महल या मंदिर था और शाहजहां ने इसे मकबरे में परिणत कर लिया।
निर्माण में 22 वर्ष लगे और 20,000 मजदूर जुटे
एक अंग्रेज यात्री व लेखक पीटर मंडी 1631-32 में आगरा में रहा। उसने लिखा कि शाहजहां अपनी मृतक बेगम के ताजमहल बनवा रहा है। उसकी बेगम की बुरहानपुर में मौत हुई थी। इमारत में सोना और चांदी साधारण धातु की तरह लगाया जा रहा है। साधारण पत्थरों के स्थान पर संगमरमर का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा फ्रांसीसी जौहरी टेरवनियर सन 1640-41 और अंत में 1665 में आया था और उसने लिखा कि ताजमहल बनने में 22 वर्ष लगे 20000 आदमियों ने काम किया।
ये थे फरमान और ऐसे हुई व्यवस्था
खूबसूरत ताजमहल को लेकर मुगल शाहजहां ने मिर्जा राजा जय सिंह को पांच फरमान जारी किए। तीन फरमान बीकानेर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार के मुख्यालय में है तथा दो फरमान जयपुर राजपरिवार के पास है। इन फरमानों के अनुसार 21 जनवरी 1632 के फ़रमान में जय सिंह को लिखा गया कि संगमरमर को आगरा पहुंचाने के लिए जितनी भी गाड़ियां मिलें भाड़े पर ले ली जाए और उन्हें तुरंत मकराना भेज दिया जाए। अल्लाहदाद को संगमरमर पहुंचाने की व्यवस्था करने भेज दिया है। अन्य फरमान के अनुसार 9 सितंबर 1632 में मलूक शाह को मकराना की नई खानों से संगमरमर लाने के लिए आमेर भेजा जाना लिखा गया। 21 जून 1637 को तीसरे फरमान में कहा गया कि संगतराशों को आमेर और राजनगर में नहीं रोका जाए। इससे मकराना में संगमरमर निकालने में खनिकों की कमी हो जाती है। जितने भी कारीगर मिलें उन्हें मकराना के मुसद्दी के पास भेज दिया जाए।
