Thar पोस्ट, न्यूज। राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का 60वां प्रांतीय अधिवेशन 28 मार्च को सीकर में सम्पन्न हुआ । उद्घाटन-सत्र के मुख्य अतिथि केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी थे, जबकि अध्यक्षता राज्य के पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने की। विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. जे. पी. सिंघल थे।

कैलाश चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि केंद्र सरकार का मानना है कि उत्तम शिक्षा से ही राष्ट्र का निर्माण होता है, इसलिए वह नई शिक्षा-नीति लेकर आई है – जबकि राजस्थान की सरकार को शिक्षा की कोई चिन्ता नहीं है। राज्य सरकार बिना संसाधनों के नए-नए महाविद्यालय खोलती जा रही है। बिना शिक्षकों व वित्तीय प्रावधानों के शिक्षण-संस्थान खोलने से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा का ढाँचा बुरी तरह चरमराया हुआ है और रीट में हुए भ्रष्टाचार से पता चलता है कि सरकार युवाओं के सपनों को कुचलने पर आमादा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. जगदीश प्रसाद सिंघल ने संगठन की रीति-नीति पर प्रकाश डाला। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. दीपक शर्मा व महामंत्री डॉ. सुशील बिस्सु ने शिक्षकों की समस्याओं की ओर सभी का ध्यान आकृष्ट किया।

इससे पूर्व देराश्री स्मृति व्याख्यान सम्पन्न हुआ, जिसके मुख्य वक्ता संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान नई दिल्ली के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा थे। प्रो. सलूजा ने नई शिक्षा नीति लागू किए जाने को एक क्रांतिकारी कदम बताया। अध्यक्षता करते हुए पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी श्री कन्हैया लाल बेरवाल ने कहा कि आचरण की शुद्धता ही जीवन का है।

दूसरे दिन ’स्वतन्त्रता-आन्दोलन में शिक्षा व शिक्षक की भूमिका’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसके मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय में कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नन्दकिशोर पांडे थे। प्रो. पांडे ने कहा कि भारत का स्वतन्त्रता-संघर्ष पूर्णतया गुरु-परम्परा पर आधारित रहा है, क्योंकि प्रारम्भ से ही हमारे गुरु इस बात के लिए सचेत रहे हैं कि नई पीढ़ी को स्वराज व स्वशासन का अर्थ अच्छी तरह समझ में आ जाए। अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री हनुमानसिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों ने हमें सनातन नेतृत्त्व प्रदान किया है। समापन-सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री निम्बाराम थे, जबकि अध्यक्षता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री महेन्द्रजी कपूर ने की। अपने उद्बोधन में श्री निम्बारामजी ने कहा कि सच्चा शिक्षक वही है, जो नित्य नूतन व चिर पुरातन के राष्ट्रीय दर्शन को समझते हुए देश के युवाओं का मार्गदर्शन करे। उन्होंने कहा कि हमें स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर जाना है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए श्री महेन्द्र कपूर ने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ भारत के वास्तविक सांस्कृतिक स्वरूप का उद्घाटन करने व स्वतंत्रता-संघर्ष के मूल चिन्तन को लोक तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रमों की एक शृंखला के साथ आगे बढ़ रहा है।अधिवेशन में प्रदेश भर के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के नौ सौ से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।