Thar पोस्ट न्यूज। बीकानेर के श्रीजी रतन बिहारीजी मंदिर प्रांगण में कथा व्यास के रूप में पुष्टिमार्गीय मर्मज्ञ श्री माधवकृष्ण शास्त्रीजी (मथुरावाले) ने वृंदावन की पावन धरा का अहसास बीकानेर में अपनी ओजस्वी वाणी में कर दिया। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी प्रेम व भाव के भूखे है। प्रेम से ही अपना बना सकते हो। शास्त्रीजी द्वारा जब वृंदावन की छटा को संगीतमय तरीके से प्रस्तुत किया गया तो पंडाल में कथा श्रवण कर रही महिलाएं भाव विभोर हो गई। अनेक महिलाएं नृत्य करने लगी। दूसरे दिन भी पूरा परिसर भक्तों से भरा रहा। यहाँ मंदिर में 1 से 7 जून तक जगद्गुरु वैष्णवाचार्य प्रपन्नाचार्य पीठाधीश्वर गो. 108 श्री वल्लभरायजी महाराजश्री (कामवन) की आज्ञा से एवं आहिताग्नि गो. श्री वैष्णवजिवन जी बाबाश्री के सान्निध्य में तथा पि. गो. श्री विट्ठलनाथजी (प्रजानाथजी) की आज्ञा एवं अध्यक्षता में अनुश्ठान हो रहा है।

