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aswal बीकानेर में नशे के खतरनाक हालात, 'मिशन रोशनी' से बदलेगी तस्वीर Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट
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Thar पोस्ट न्यूज। नशा ही नाश का द्वार है। नशे में भटके युवाओं को एक नई दिशा टेने के उद्देश्य से एन.आर.असवाल चैरिटेबल सस्था एवं मनोचिकित्सक डॉ सिद्धार्थ असवाल के संयुक्त तत्वाधान में मिशन रोशनी” अभियान चलाया जाएगा। जिसके तहत 10 वर्ष से 17 वर्ष तक के बच्चों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी प्रदान की जाएगी। बीकानेर में आज पत्रकारों को जानकारी देते हुए डॉ सिद्धार्थ असवाल ने बताया कि मिशन रोशनी एक राह है सामाजिक बदलाव की और यह सामाजिक बदलाव कोई सामान्य बदलाव नहीं है यह बदलाव उन लोगों के लिए है जो अपने अच्छे-खासे जीवन में तरह-तरह का नशे का सेवन करके अपने जीवन में घोर अंधेरा उत्पन्न कर लेते हैं। इस अंधेरे में उनके सपने, उनकी आकांक्षाएं उनके बच्चों की पढ़ाई, उनके परिवार का भविष्य और उनकी आर्थिक और सामाजिक प्रतिष्ठा सब बर्बाद हो जाती है। ऐसे लोग जो नशे के अंधकार में डूब गए हैं उन्हें नशा मुक्त कर उनके जीवन में रोशनी उत्पन्न कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़कर उनके की जीवन में बदलाव लाना है और यह बदलाव आप सब के सहयोग के बिना संभव नहीं है। बीकानेर शहर में नशे की वर्तमान स्थिति को लेकर किए गए विभिन्न अध्ययनों एवं रिपोर्ट के अनुसार आंकडे काफी चिंताजनक है बीकानेर में नशे का स्वरूप पारंपरिक से लेकर आधुनिक ड्रग्स तक फैला हुआ है पहले लोग यहां तंबाक बीड़ी सिगरेट भांग और शराब का सेवन करते थे वहीं वर्तमान में यहां अफीम स्मैक हीरोइन, चित्त ज्वाइंट एमडी और विभिन्न प्रकार के मेडिकल के नशों का प्रयोग करने लगे है।सांख्यिकी विवरण एक एपिडेमियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार बीकानेर में लगभग 25.14 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में नशे का सेवन करती है। बीकानेर की लगभग 8.7 लाख की शहरी आबादी में से लगभग 2 लाख लोग (हर चौथा व्यक्ति) नशे का प्रयोग करता है।पिछले 10 वर्षों में 10-17 वर्ष के बच्चों/किशोरों में नशे की प्रवृत्ति 2 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है। कॉलेज जाने वाली युवा पीढ़ी के लगभग 29.5 प्रतिशत छात्र किसी न किसी नशे के चंगुल में हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक महीने कम से कम 4 स्कूल,कॉलेज, कोचिंग या सार्वजनिक स्थानों पर अवेयरनेस प्रोग्राम/ जन जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे। साथ ही विभिन्न संस्थाओं जैसे पुलिस विभाग प्रशासन समाज कल्याण विभाग, प्रसार ,मेडिकल विभाग एवं शिक्षा विभाग जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। स्कूल, कॉलेज में युवाओं को जोड़कर यूथ क्लब का निर्माण किया जाएगा जो नशा मुक्त बीकाना कि परिकल्पना को साकार करेगा। वहीं कॉलोनी ,गली एवं मोहल्लों में नशा मुक्ति हेतु ऐच्छिक कार्य करने वाले युवाओं को रोशनी वोलिनटीयरस बनाया जाएगा। प्रत्येक महीने की 7 तारीख को निशुल्क नशा मुक्ति शिविर का आयोजन किया जाएगा तथा अत्यंत गरीब नशा करने वाले व्यक्तियों को दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएगी। मनोचिकित्सकों द्वारा नशा करने वाले व्यक्तियों की काउंसलिंग की जाएगी जिससे वह नशा छोडऩे के लिए प्रेरित हो साथ ही उनके मन के अंदर जो भी भ्रम है को दूर किया जाएगा।


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