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SAVE 20260328 214654 विचार मोक्ष का द्वारपाल होता है : डॉ चारण* मधु आचार्य ' आशावादी ' की दो पुस्तकों ' का विमोचन Rajasthan News Portal साहित्य
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Thar पोस्ट न्यूज। कवि, नाटककार, आलोचक व पंचम वेद की टीका करने वाले रचनाकार डॉ अर्जुन देव चारण ने कहा कि विचार मोक्ष का द्वारपाल है। इस कारण ही जीवन में साहित्य की विशेष महत्ता है। साहित्य विचार की ही अभिव्यक्ति है इसलिए इस कर्म को ऋषि कर्म माना गया है।रमेश इंग्लिश स्कूल, बीकानेर के प्रेक्षागृह में भगवान दास किराड़ू नवीन समिति द्वारा आयोजित मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘ की पुस्तकों साहित्य आलेख ‘ अर्जुन – आचार्य संवाद ‘ व कहानी संग्रह ‘ बादल का एक टुकड़ा ‘ के लोकार्पण अवसर पर बोलते हुए डॉ चारण ने कहा कि जिज्ञासा का जीवित रहना ही व्यक्ति का जीवित रहना है, साहित्य जिज्ञासाओं का जवाब होता है।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जिज्ञासा की वृत्ति कमजोर हो गयी, उससे ही व्यक्ति साहित्य से कटा है। उनका कहना था कि कही हुई बातों को दोहराना और फिर से कहना इस कारण जरुरी है, क्योंकि स्मृति से विचार को जिंदा रखा जा सके। अर्जुन – आचार्य संवाद को एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक बताते हुए डॉ चारण ने कहा कि यह इस दौर की महत्त्वपूर्ण व उपयोगी पुस्तक है।

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए आलोचक राजाराम भादू ने कहा कि अर्जुन देव चारण व मधु आचार्य साहित्य में एक्टिविस्ट वृत्ति के रचनाकार है। जो केवल अपना नहीं, हर रचनाकार का ख्याल रखते है। अर्जुन आचार्य संवाद पुस्तक के जरिये इन दोनों रचनाकारों ने साहित्य की मूल भावना को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने का काम किया है। कहानी संग्रह को उन्होंने कथ्य व शिल्प की दृष्टि से सुंदर पुस्तक बताया।

अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बोलते हुए लेखक मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘ ने कहा कि अर्जुन जी अनोपचारिक बातचीत हुई। जिसमें साहित्य की गूढ़ बातें सहज रूप से समझने व जानने को मिली। उनकज ही सरल भाषा मे पाठकों व रचनाकारों तक पहुंचाने का प्रयास यह संवाद की पुस्तक है।

अर्जुन – आचार्य संवाद ( साहित्य आलेख ‘ पर व्यंग्यकार, लेखक प्रमोद चमौली ने व कहानी संग्रह ‘ बादल का एक टुकड़ा ‘ पर कवयित्री, कथाकार मनीषा आर्य सोनी ने पत्रवाचन कर पुस्तको पर आलोचनात्मक टिप्पणी। स्वागत भाषण डॉ प्रशांत बिस्सा ने दिया और धन्यवाद नगेन्द्र किराड़ू ने ज्ञापित किया। लेखक परिचय संयोजक संजय पुरोहित ने दिया। इस आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी, बुलाकी शर्मा, कमल रंगा, नवनीत पांडे, राजेन्द्र जोशी, अजय जोशी, गौरीशंकर प्रजापत, पृथ्वीराज रतनू, अमित गोस्वामी, रवि शुक्ला, रंगकर्मी दयानन्द शर्मा, विजय सिंह राठौड़, नवल व्यास आदि उपस्थित थे।


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