





Thar पोस्ट। इस बार होली पर्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अनेक कार्यलयों में 3 मार्च का अवकाश होली खेलने वाले दिन को मानकर रखा गया है जबकि 4 मार्च को धुलंडी पर्व मनाया जा रहा है। आखिर यह भ्रम की स्थिति कैसे पैदा हुई। चंद्र ग्रहण भी इसकी वजह बना हुआ है। लेकिन हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार, ग्रहों के मुताबिक होलिका दहन 2 मार्च को करना शास्त्र सम्मत माना गया है। 2 मार्च को शाम में पूर्णिमा तिथि लगेगी। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम में 5 बजकर 56 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और अगले दिन 5 बजकर 8 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। 2 मार्च को भद्रा मुख मध्यरात्रि 2 बजकर 38 मिनट से सुबह में 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। ऐसे में 2 मार्च को ही होलिका दहन करना शुभ रहेगा। होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है जो कि 2 मार्च को है। 3 मार्च की शाम 5 बजकर 8 मिनट तक पूर्णिमा तिथि तो रहेगी लेकिन इस समय चंद्रग्रहण भी होगा। दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से चंद्र ग्रहण आरंभ हो जाएगा और शाम में 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। लेकिन उससे पहले ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। जबकि रंगोत्सव चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। जोकि 4 मार्च को है। इसलिए रंगोत्सव होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। शास्त्रों की मानें तो 2 मार्च को दहन है जबकि 4 मार्च को रंगोत्सव धुलंडी है। 3 मार्च को ग्रहण है।




