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IMG 20251107 WA0050 बीकानेर में तब पहली बार पहुंची थी ट्रेन, भामाशाह डागा का खास योगदान धोरों के बीच काले इंजन से वंदे भारत का रोचक सफर-एक नज़र Rajasthan News Portal इतिहास/ रोचक किस्से
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Thar पोस्ट न्यूज (जितेंद्र व्यास)। कड़ाके की एक भीषण सर्दी में धोरों की धरती बीकानेर को चीरते हुए 1891 में काले भाप के इंजन के पीछे अपने डिब्बे कुनबे को लिए पहली बार ट्रेन पहुंची। भयानक सर्दी व धोरों की बात इसलिए कि अधिकांश स्थलों पर लाइट थी नही। आज भी बीकानेर में 18 प्रमुख धोरे है। तब दिन था 9 दिसंबर का। जब सर्दी की पराकाष्ठा हुआ करती थी। यह भी कहा जा सकता है कि लोग सर्दी के नाम से ही डर जाते थे। वाहन बहुत कम थे। बीकानेर में आबादी बहुत कम। ऊपर से घर भी खुले खुले से। ब्रिटिश हुकूमत का असर था। स्थितियाँ बदहाल थी। लेकिन बीकानेर तब भी अपनी संस्कृति, खानपान से समृद्ध था मिलावट की तो कोई कल्पना भी नही कर सकता था। मशीनें थी ही नही। खैर, जैसे कि मैंने बताया कि पर्यटन की दृष्टि से उत्तर पश्चिम रेलवे का बीकानेर स्टेशन (राजस्थान) पूरे विश्व पटल पर मिठाई व नमकीन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है l इसके साथ ही बीकानेर ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक दृष्टि व सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है l बीकानेर जूनागढ़, रामपुरियों की हवेली, गजनेर किला, लालगढ़ पैलेस, लक्ष्मी निवास करणी माता मंदिर (देशनोक) के साथ ही कैमल सफारी के लिए विख्यात है l बीकानेर रेलवे ने छुक-छुक से वन्दे भारत तक तय किया रेल का शानदार सफ़र :-
बीकानेर में 9 दिसम्बर से 1891 में भाप से चली रेल ने 25 सितम्बर 2025 को भारत की शान `वन्दे भारत ट्रेन’ तक का शानदार सफ़र तय किया है l बीकानेर में भाप के इंजन से अपना सफर शुरू करने वाली रेल ने आज इलेक्ट्रिक इंजन से चलने तक सफर तय कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है l स्टेशन की हेरिटेज बिल्डिंग से लेकर 471 करोड़ रु की लागत से मेजर अपग्रेडेशन का सफ़र :-
बीकानेर रेलवे स्टेशन का निर्माण 1891 में शहर के जाने-माने व्यापारी राय बहादुर दीवान सर कस्तूरचंद डागा द्वारा 3,46,000 रुपए का दान देकर कराया गया। बीकानेर को पहला रेलवे लिंक 9 दिसंबर 1891 को स्थापित हुआ था। वर्तमान में बीकानेर मंडल तीन राज्य और राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक फैला हुआ है। लगभग 1780 रूट किलोमीटर तथा 2316.472 किलोमीटर ट्रैक किलोमीटर के साथ यह भारतीय रेलवे का सर्वाधिक ट्रैक किलोमीटर तथा रूट किलोमीटर के हिसाब से द्वितीय स्थान वाला मंडल है। वर्तमान में बीकानेर रेल मंडल में 199 स्टेशन हैं । रेलवे द्वारा यहाँ यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के लिए बीकानेर स्टेशन पर 471 करोड़ रूपये की लागत से ‘‘अमृत भारत स्टेशन’’ योजना के तहत स्टेशन का मेजर अपग्रेडेशन का कार्य किया जा रहा है, जिसमें आधुनिकता के साथ स्थानीय कला एवं संस्कृति का समावेश किया जा रहा है l इससे यात्रियों को हेरिटेज लुक के साथ विश्वस्तरीय सुविधाएँ जल्द मिलेंगी l 01नवम्बर 1924 को बीकानेर रेलवे ने जोधपुर रेलवे से अलग होकर स्वतंत्र रेलवे की स्थापना की, जिसको अब 100 वर्ष से अधिक पूरे हो चुके हैं l

बीकानेर स्टेशन पर 07 से 13 नवंबर तक स्टेशन महोत्सव मनाया जा रहा है बीकानेर महोत्सव के अवसर पर बीकानेर स्टेशन के विकास के ऐतिहासिक सफर को दर्शाती हुई एक रोचक एवं मनमोहक प्रदर्शनी स्टेशन परिसर में लगाई गयी है ।इस अवसर पर यहां समारोह भी हुआ। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर रेलवे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बीकानेर रेलवे स्टेशन का गौरवशाली इतिहास है जिसमें बीकानेर से नागौर तक चली प्रथम रेल गाड़ी से वन्दे भारत ट्रेन तक का सफ़र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बीकानेर स्टेशन से बड़े बड़े महापुरुषों ने सफ़र किया है और क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। स्टेशन महोत्सव के बारे में बताया कि प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुसार जिन स्टेशनों के सौ वर्ष पूरे हो गए हैं उनके गौरवशाली इतिहास को स्टेशन महोत्सव के माध्यम से आम जन तक पहुंचाया जाना चाहिए। श्री मेघवाल ने स्टेशन पुनर्विकास के बारे में बताया कि बीकानेर स्टेशन पर 471 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास कार्य किए जाएंगे जिससे क्षेत्र के निवासियों को अत्याधुनिक वह बेहतर रेल सुविधाएँ मिलेंगी । समारोह में उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री अमिताभ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर पश्चिम रेलवे पर यात्री सुविधाओं के अनेक किए जा रहे हैं जिसमें 77 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य किया जा रहा है। श्री अमिताभ ने जन प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सक्रिय योगदान से रेल कार्यों को गति मिलती है।


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