


Thar पोस्ट न्यूज (जितेंद्र व्यास)। इस साल पर्यटकों की आवक में कमी देखी जा रही है या कहें कि पर्यटक अकाल ने पर्यटन एवं होटल कारोबारियों, गाइड, एस्कॉर्ट्स आदि की कमर तोड़ दी है। यूरोप में जुलाई अगस्त में अवकाश के दिनों में भारत मे आने वाले सैलानियों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन इस बार देशी विदेशी पर्यटक नहीं के बराबर आये। ज्ञात रहे कि पर्यटन की वजह से अकेले राजस्थान में हज़ारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।




दरअसल, इस बार यूरोप में भीषण गर्मी पड़ी। इससे वहाँ लोग प्रभावित हुए। इसके साथ ही फुटबाल मैच की वजह से भी विदेशी लोगों ने घूमने फिरने में रूचि नही दिखाई। जबकि महंगाई के चलते भारत के अनेक राज्यो से देशी पर्यटक भी कम रूचि दिखा रहे है। ये कुछ कारण हो सकते है लेकिन पर्यटन क्षेत्र में हाल ही के वर्षों में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। इन बदलावों में कुछ तो ऐसे है जिससे पर्यटन व्यवसाय पर गहराई से असर हुआ है।
जानकारों के मुताबिक अब केवल कोई भी व्यवसायी केवल देशी विदेशी सैलानियों की आवक के भरोसे अपना पर्यटन कारोबार नही चला सकते। केवल लोक संगीत व कैमल सफारी आदि से पार नही पड़ेगी, क्योंकि कारोबार भी केवल सीजन तक सीमित रहेगा। बदलाव को समझना पड़ेगा, पर्यटक अब किसी न किसी इवेंट से जुड़ना चाहते है। हालांकि देश के महानगरों सहित राजस्थान की बड़ी व हैरिटेज होटलें इस बदलाव को भांप चुकी है और वैसी ही सुविधाएं दे भी रही है। अब टूरिस्ट्स उन स्थानों को प्राथमिकता दे रहा है जहाँ उसे होटल गेस्ट हाउस में ठहराव के साथ हमारी संस्कृति में घुलने मिलने का अवसर मिले। दूसरी और लोग होटलों में या ग्रामीण इलाकों में बने रिसॉर्ट्स में शादी विवाह व अन्य मांगलिक कार्य करने लगे है। राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, पुष्कर जैसलमेर आदि जिलों में ‘वेडिंग टूरिज्म’ तेजी से उभर रहा है।
बीकानेर में एक प्राचीन निजी गार्डन तो केवल शादियों के लिए तेजी से पॉपुलर हुआ है। देशी विदेशी पर्यटक भी भ्रमण के लिए उन ट्रेवल कंपनियों से संपर्क कर रही है जो उन्हें वहां की संस्कृति रीति रिवाज, विबाह समारोह को नजदीक से देखने समझने का मौका दे सके। वेडिंग टूरिज्म ने अनेक बड़ी होटलों को घाटे से उबार कर लाभ की स्थिति में ला खड़ा किया है। वेडिंग टूरिज्म ने अनेक पर्यटन कारोबारियों के लिए नई राह खोल दी है।
