ताजा खबरे
FB IMG 1780229569862 यूरोप की यात्रा- भाग : 3 बीकानेर से इटली का अनूठा जुड़ाव Rajasthan News Portal पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय
Share This News

वरिष्ठ पत्रकार अशोक माथुर की कलम से : सुबह स्विट्ज़रलैंड से हम इटली की ओर जल्दी ही रवाना हो गए। व्यवस्थित हाई-वे पर भारी वाहनों के साथ कारें भी दौड़ रही थी, कई कारों पर साइकलें भी जुड़ी हुई थी। इटली यूरोपियन यूनियन का एक देश है। भारत और इटली के बीच सदा से ही अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान टेस्सिटोरी भारत आए थे। राजस्थान के रजवाड़ों में उनकी विशेष दख़ल थी। वे यहाँ की संस्कृति में बहुत जल्दी ही घुल-मिल गए थे। टेस्सिटोरी ने राजस्थान की भाषा सीखी और उस पर कलम भी चलाई। अंतिम समय तक वे बीकानेर में रहे। आज भी उनकी कब्र पर राजस्थानी भाषा के विद्वान हर वर्ष इकट्ठे होते हैं। विश्वयुद्ध का समय उथल-पुथल का था। ब्रिटिश सेनाओं के लिए रजवाड़े जी-जान से लगे हुए थे। कोई राजा मारा हो, ऐसा तो सुनने में नहीं आया लेकिन गाँव-गाँव से जुटाए गए सैनिक, जिन्हें तुरंत-फ़ुरत बंदूक़ और तोप चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था, वे मारे भी गए और बंदी भी बने। इटली की भी इसमें कूटनैतिक भूमिका थी। इस कारण हमारे दिमाग़ में यह सब बातें चल रही थी।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी भी इटली के छोटे से गाँव से भारत आईं और यहाँ रच-बस गईं। इटली के लोगों में सीखने व अन्य लोगों के साथ समन्वय बनाने की अपूर्व क्षमता है। रोम के पास वैटिकन सिटी ईसाई धर्मावलम्बियों का धार्मिक स्थान है। पोप की कृपा सदा भारत पर बनी रही है। रोमन सभ्यता के क़रीब जाते हुए इतिहास के पन्नों में जाए बग़ैर कैसे रहा जाता।

इटली बॉर्डर पर मिड-वे पर कार-पार्किंग, पेट्रोल पम्प तथा भोजनालय और विश्राम की अच्छी व्यवस्था थी। दोपहर का खाना इस मिड-वे पर खाने के लिए हम खुले स्थान में बैठे। हमारी मेज़ से मैदानों में चरती गाएँ, हरी-भरी पहाड़ियाँ और तेज़ गति से दौड़ते हुए वाहन दिखाई दे रहे थे। यही सुना था कि यूरोप में माँसाहार ज़्यादा है लेकिन हर मेज़ पर सलाद व सब्ज़ियाँ भरपूर दिखाई दे रही थी। हमने भी एक ट्रे में अपनी पसंद का खाना लेकर आनंद व शांति के साथ खाया। मेरे सामने हष्ट-पुष्ट गाएँ भी हरे-भरे चारागाह में लंच कर रही थीं। इस मिड-वे पर कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों को भी लाए थे।

उनके लिए भी अलग से बर्तनों में खाने-पानी का प्रबंध था। वे अपने मालिकों के साथ ही बग़ैर किसी हुड़दंग के हवा व धूप का आनंद ले रहे थे। हर-एक को अपना खाना खाने के बाद अपने भोजन की ट्रे उठा कर ट्रॉली में स्वयं ही रखनी होती थी। वेटर को जब पता चला कि हम भारतीय हैं, तो उसने प्रसन्नता ज़ाहिर करते हुए हमारा अभिनंदन किया।

पेट-पूजा के बाद यात्री को आगे बढ़ना ही होता है। हम लोग भी ‘लुगानो’ शहर की ओर रवाना हुए। लुगानो स्विट्ज़रलैंड में है और इटली का सीमांत शहर है। सीमा पार करते वक्त हमें आराम से आगे बढ़ने दिया गया। पासपोर्ट, वीज़ा इत्यादि न तो देखा गया, न ही कार रोकी गई। लुगानो पहुँचते पहुँचते सूरज छिपने लगा था। जिस अपार्टमेंट में हमें रहना था, उसकी चाबी निर्धारित स्थान पर रखी हुई थी। कार पार्क करने के बाद चाबी लेकर हम अपार्टमेंट में गए। अदिति व उसकी माँ सुबह के नाश्ते का सामान लेने बाज़ार चले गए। हमने कॉफ़ी मशीन में कॉफ़ी बनाई और कुछ खा-पी कर सो गए।

यह बड़ा विचित्र लग रहा था कि न कोई मैनेजर था और न ही कोई पूछने वाला। अब तुम्हारे हवाले अपार्टमेंट साथियों! अपार्टमेंट की सुविधा अति-उत्तम थी। हम ही इस रात के बादशाह थे, पर सूरज उगने पर हमें यात्रा आगे बढ़ानी थी।

सुबह चैकआउट के निश्चित समय पर हम तैयार हो गए और उसी वक्त एक महिला अपार्टमेंट को पुनः व्यवस्थित करने आ गई। सामान कार में डाल कर व चाबी यथास्थान रख कर हम इटली के एक ऐतिहासिक शहर व मशहूर पर्यटन स्थल वेनिस के लिए रवाना हो गए।


Share This News