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ScreenShot2020 08 19at5.45.42PM 121 यौन शक्ति के लिए खा रहे हैं गधे ? Rajasthan News Portal दिल्ली, बीकानेर अपडेट
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Tp न्यूज़। देश में गधों को विलुप्त होने की श्रेणी में रखा गया है। आंध्र में गधों पर संकट मंडरा रहा है। विचित्र बात यह है कि यौन शक्ति बढ़ाने के लिए मांस खा रहे लोग। कम हो रही है
देश में गधों को विलुप्त होने वाले जानवरों की लिस्ट में रखा गया है. अगर जल्द ही गधों की जनसंख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई तो कई राज्य से यह जानवर पूरी तरह से गायब हो सकता है. गधों की संख्या कम होने के पीछे मांस के लिए उन्हें मारा जाना वजह है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के मुताबिक, गधे ‘फूड एनीमल’ के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं हैं. इन्हें मारना अवैध है। आंध्र प्रदेश में गधे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। यहां पर गधों को मारकर उनके अवशेषों को नहरों में फेंका जा रहा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा पैदा हो गया है। बाजार में गधों का मांस करीब 600 रुपये किलो बिक रहा है। मीट बेचने वाले एक गधा खरीदने के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक दे रहे हैं। ऐसे में मांस के लिए गधों को अंधाधुंध काटा जा रहा है। इस पर रोक लगाना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारत में गधों के मांस का उपयोग कई लोग खाने के लिए करते हैं. आंध्र प्रदेश में गधों के मांस को लेकर कई धारणाएं हैं। यहां के लोगों को लगता है कि गधे का मांस कई समस्याओं को दूर कर सकता है. वे मानते हैं कि गधे का मांस खाने से सांस की समस्या दूर हो सकती है. उन्हें यह विश्वास भी है कि गधे का मांस खाने से यौन क्षमता भी बढ़ती है। इन गलत धारणाओं की वजह से लोग गधे के मांस का इस्तेमाल भोजन के तौर पर कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी समेत कई जिलों में गधों को मारा जा रहा है। इनमें कृष्णा, प्रकाशम और गुंटूर समेत कई दूसरे इलाके शामिल हैं। यहां उनके मांस की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है।
एनिमल रेस्क्यू आर्गेनाइजेशन के सेक्रेटरी गोपाल आर सुरबाथुला का मानना है कि गधों के अस्तित्व पर गंभीर संकट है। राज्य से गधे करीब-करीब गायब हो गए हैं. उन्हें पशु क्रूरता निवारण एक्ट 1960 के नियमों के तहत अवैध तरीके से मारा जा रहा है. यह स्थानीय नगरपालिका एक्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी खिलाफ है।
2019 में आंध्र प्रदेश में गधों की आबादी केवल 5 हजार रह गई थी. उसी साल प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में गधों की संख्या तेजी से कम होने के चलते वहां के स्टेट एनीमल हज्बेंड्री डिपार्टमेंट ने इसे रोकने के लिए सभी कलेक्टरों को सर्कुलर जारी किया था. तब पशु अधिकार कार्यकर्ता और केंद्रीय मंत्री रह चुकीं मेनका गांधी ने गधों की अवैध कटाई को भी उनकी घटती आबादी के लिए जिम्मेदार बताया था। आपको बता दें कि बीकानेर में फ्रांस के गधे रखे गए है ये घोड़ों की तरह दिखाई देते है। राष्ट्रीय अश्व उत्पादन परिसर में इन्हें खच्चर तैयार करने के लिए रखा हुआ है।


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