IMG 20221226 WA0058 ऊँट उत्सव पर मंडराए थे काले बादल ? फिर हुआ यह Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट, न्यूज। ऊंट उत्सव भाग -5 जितेंद्र व्यास। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहाँ ऊंटों का इतना सम्मान किया जाता है। यहाँ तक की लाख रुपए तक इसका श्रृंगार किया जाता है। बीकानेर की संस्कृति का एक अहम् हिस्सा है रेगिस्तान का जहाज। आज बात करूंगा एक ऐसी घटना के बारे में जिसने ऊंट उत्सव के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। काले बादल मंडराने लगे और उत्सव हमेशा के लिए बंद होने के कगार पर पहुंच गया। लेकिन इस बार भी इस उत्सव की शुरुआत करने वाले राजेंद्र सिंह शेखावत और उनके सहयोगियों ने हार नहीं मानी और जीत भी उनकी हुई। यहाँ एक बात कहना चाहूंगा कि राजेन्द्र सिंह सरकार के ही नुमाइंदे थे। उनकी यह गहरी इच्छा थी कि यहाँ इस थार के रेतीले समुंदर में कोई उत्सव होता है तो निश्चित तौर पर बीकानेर का नाम पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा। उनका यह सपना सत्य भी साबित हुआ। राजेन्द्र सिंह किसी तरह सरकार के आकाओं को मनाने में कामयाब रहे। राज्य सरकार ने 1997 में उत्सव के लिए बजट की व्यस्वस्था नहीं की। सरकार ने उस साल उत्सव को अनुपयोगी माना। इस पर सहायक निदेशक ने बीकानेर में एक बैठक बुलाई तथा अपनी मंशा जाहिर की। यह पहली बार हुआ जब सरकार ने इसे अनुपुयोगी माना। इसमें सभी ट्रेवल एजेंट्स, होटल संचालकों, पर्यटन व्यवसाय करने वालों, गाइड आदि ने एकजुटता दिखाई। सभी ने एक कहा कि उत्सव होकर रहेगा। हमारे हाथ से नहीं जायेगा। उन दिनों में 50 हज़ार रूपए की व्यवस्था आपसी सहयोग से की गयी। इस तरह निजी सहयोग से बीकानेर में पहली बार ऊंट उत्सव हुआ। हालांकि इसके बाद से सरकार ने उत्सव का बजट हमेशा बढ़ाया।


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