






Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में निजी स्कूल संघर्ष समिति ने सरकार को निजी स्कूलों के आर्थिक हालात का हवाला देते हुए ठोस कदम उठाने के लिए कहा है। राजस्थान निजी स्कूल संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक लालसिंह झाला ने दावा किया कि राज्य के करीब 90 प्रतिशत निजी विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। यदि मध्यम श्रेणी और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूल बड़ी संख्या में बंद होते हैं तो करीब 10 लाख कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं और लाखों बच्चों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। झाला ने कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी होती जा रही हैं, जिनसे निजी विद्यालयों के लिए काम करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से 30 जनवरी से लगातार सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। 25 जून को शिक्षा मंत्री से मुलाकात भी की गई लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने निजी स्कूलों की प्रमुख समस्याओं में आरटीई के तहत मिलने वाले भुगतान का वर्षों से लंबित होना बताया। उनके अनुसार सरकार ने केवल सत्र 2024-25 का भुगतान किया है, जबकि अन्य बकाया राशि अब भी लंबित है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल आर्थिक दबाव के बावजूद आरटीई के तहत बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
निजी स्कूलों की जांच व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि वर्ष 2018 से चल रही जांच प्रक्रिया के कारण विद्यालयों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। भवन, स्टाफ, प्रवेश और अन्य मानकों की जांच जरूरी है, लेकिन जांच प्रक्रिया में विद्यालय प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर गुणवत्ता सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि जांच व्यवस्था कहीं-कहीं इंस्पेक्टर राज का रूप लेती जा रही है। निजी विद्यालयों में करीब 85 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को अचानक सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन होगा।
उन्होंने कहा कि हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा उससे बेहतर जीवन जिए और शिक्षा ही गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। यदि निजी स्कूल बड़ी संख्या में बंद होते हैं तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा। निजी विद्यालयों में करीब 85 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को अचानक सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन होगा।
उन्होंने कहा कि हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा उससे बेहतर जीवन जिए और शिक्षा ही गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। यदि निजी स्कूल बड़ी संख्या में बंद होते हैं तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा।
