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IMG 20260629 234335 चुनाव : आरक्षण की लॉटरी के बाद गरमाई राजनीति, सभी 'धुरंधर' अपनी गोटियां बदलने पर मजबूर, जैसलमेर का एक वार्ड सब पर भारी ? Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में इन दिनों मानसून की सक्रियता के बीच राजनीति मंथर गति से सुलगने लगी है। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी ने राजनीति के धुरंधरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आरक्षित सीटों पर टकटकी लगाए इन नेताओं ने अपनी गोटियों को बदलना शुरू कर दिया है। प्रदेश में लॉटरी के बाद तस्वीर साफ होने के साथ ही कहीं सामान्य सीट खुलने से पुराने दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है तो कहीं महिला, OBC, SC और ST आरक्षण ने नए चेहरों के लिए मैदान खोल दिया है।

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पश्चिम राजस्थान के जैसलमेर में एक अलग तस्वीर बन रही है। पर्यटन नगरी में जिला परिषद अध्यक्ष की सीट ST के लिए रिजर्व की गई है। जैलसमेर जिला परिषद में कुल 21 वार्ड हैं लेकिन यहां एसटी के लिए सिर्फ एक वार्ड रिजर्व है। ऐसे में जैसलमेर में जिला परिषद का पूरा चुनाव इस एक वार्ड पर केंद्रीत हो गया है। जो पार्टी इस वार्ड को जितेगी उसी का जिला प्रमुख होगा। नगर निगम मेयर पदों की लॉटरी में जयपुर और जोधपुर सामान्य रहने से दोनों बड़े शहरों में मेयर पद के दावेदारों की दौड़ तेज होगी। यहां वरिष्ठ नेताओं, पूर्व पार्षदों और राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरों के बीच टिकट के लिए जोर आजमाइश बढ़ सकती है।
बीकानेर में महापौर की सीट सामान्य है। यहां दिग्गज नेता बड़ा दाव खेलेंगे। कोटा मेयर पद OBC महिला के लिए आरक्षित होने से कई पुरुष दावेदारों की राजनीतिक गणित बिगड़ गई है। अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों को स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाली OBC महिला नेता की तलाश करनी होगी।

जबकि नगर निगमों भीलवाड़ा, पाली और अलवर में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने से यहां भी टिकट की पूरी तस्वीर बदल गई है। अलवर में आरक्षण के बाद पार्टी के भीतर दावेदारी और गुटबाजी बढ़ने की संभावना है।

प्रदेश के 41 जिला प्रमुख पदों में 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें 11 सामान्य महिला, 4 SC महिला, 3 ST महिला और 2 OBC महिला के पद हैं। इसका सीधा असर उन पुरुष नेताओं पर पड़ा है जो लंबे समय से जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपने परिवार या राजनीतिक खेमे से महिला चेहरे को आगे करना होगा। दूसरी और दौसा, धौलपुर, टोंक और भरतपुर में जिला प्रमुख पद SC महिला के लिए आरक्षित हुए हैं। सलूंबर, प्रतापगढ़ और अलवर में ST महिला तथा ब्यावर और सीकर में OBC महिला के लिए आरक्षण हुआ है।

राजनीति के लिहाज से राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण बीकानेर संभाग के कई हिस्सों में महिला आरक्षण आने से पुरुष दावेदारों के समीकरण बदले हैं। बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में जिला प्रमुख पद सामान्य रहने से यहां पुराने दावेदारों की उम्मीदें कायम हैं। इन जिलों में अब मुकाबला इस बात पर होगा कि कौन सा राजनीतिक खेमा अपने समर्थक को जिला परिषद तक पहुंचाकर प्रमुख की कुर्सी तक ले जा पाता है।

प्रतापगढ़ में जिला प्रमुख पद ST के लिए आरक्षित होने से यहां भी राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। पिछली बार महिला जिला प्रमुख चुनी गई थीं। अब ST आरक्षण के कारण दोनों दलों को आदिवासी समाज में मजबूत राजनीतिक आधार वाले चेहरे को आगे करना होगा


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