






Thar पोस्ट न्यूज। एक अंग्रेज अधिकारी को गोपीनाथजी के पुजारियों ने कहा ठाकुरजी बीमार पड़ गए है। इस पर परीक्षा लेते हुए अंग्रेज अधिकारी ने अपनी घड़ी प्रतिमा को पहना दी, जो आज भी चल रही है। राजधानी जयपुर के परकोटा में या पुराने शहर की तंग गलियों में स्थित करीब 150 साल पुराना गोपीनाथ जी का मंदिर परंपरा आस्था व चमत्कार का संगम है. पूरे देश में यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान कृष्ण के रूप गोपीनाथ जी अपने हाथों में घड़ी पहनते हैं. इन्हें ‘घड़ी वाले भगवान’ के नाम से जाना जाता है

यहाँ आने वाले भक्त भगवान के दर्शन के साथ-साथ उनकी कलाई पर बंधी घड़ी को देखकर विस्मित रह जाते हैं. इस अनूठी परंपरा के पीछे एक दिलचस्प इतिहास छिपा है. कहा जाता है कि गुलाम भारत के समय एक अंग्रेज अधिकारी ने सुना कि यहाँ के विग्रह (मूर्ति) सजीव हैं और उनमें जीवन का स्पंदन है. उस जमाने में नब्ज (पल्स) से चलने वाली घड़ियाँ आती थीं, जो हाथ की धड़कन से ऊर्जा लेकर चलती थीं. अंग्रेज ने अपनी नब्ज वाली घड़ी भगवान गोपीनाथ जी की कलाई पर बांध दी. आश्चर्यजनक रूप से वह घड़ी बंद नहीं हुई बल्कि लगातार चलने लगी. इस घटना के बाद गोपीनाथ जी की ख्याति सात समंदर पार तक फैल गई गोपीनाथ जी भगवान राजपूतों के शेखावत वंश के ईष्ट देव माने जाते हैं. शेखावत समाज सहित देश-विदेश से बड़ी तादाद में श्रद्धालु यहाँ दर्शनों के लिए पहुँचते हैं. भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे यहाँ अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान को महंगी घड़ियाँ भेंट स्वरूप चढ़ाते हैं. पिछले 70 सालों से भगवान की कलाई पर निरंतर घड़ी बंधी हुई है.
श्रृंगार के साथ समय-समय पर इन घड़ियों को बदला भी जाता है. आज भी श्रद्धालु ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से विशेष रूप से इन ‘घड़ी वाले कान्हा’ के दर्शन करने जयपुर आते है। बंगाल का ब्राह्मण परिवार यहां पीढ़ियों से सेवा कर रहा है। यहां आने वाले भक्त आस्था के तौर पर घड़ी भी चढ़ाते है।
