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FB IMG 1779626191452 यूरोप की यात्रा भाग 2 Rajasthan News Portal अंतरराष्ट्रीय, पर्यटन
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Thar पोस्ट। वरिष्ठ पत्रकार अशोक माथुर की कलम से: ज़्यूरिक़ एयरपोर्ट पर पार्किंग में एक निश्चित स्थान पर हमारे लिए किराए पर ली गई कार खड़ी थी। कार में सामान रखने के बाद जब कार बाहर निकाली गई, तब कोई व्यक्ति हमें चैक नहीं कर रहा था। एक इलेक्ट्रोनिक मशीन में टिकिट डाला और खुल जा सिम सिम की तरह पार्किंग का गेट खुल गया। हम ज़्यूरिक से अदिति के शहर फ्रीबुर्ग के लिए रवाना हो गए। नज़ारा ऐसा था कि हमारी आँखों की पलकें स्थिर हो गईं। यातायात की व्यवस्था को देख कर लगा कि यहाँ सभी लोग आदतन यातायात के नियमों का पालन करते हैं। स्विट्ज़रलैंड की राजधानी बर्न कुछ ही समय में आ गई। शांत व खूबसूरत नज़ारों और आलीशान भवनों से होते हुए हम पलक के निवास स्थान पहुँचे। गाड़ी कहाँ रोकें, कहाँ पार्क करें, यह सोचना अदिति का काम था। बीकानेर जैसा मामला नहीं था कि कहीं भी रोक दो और पलक को उतार दो। निर्धारित स्थान पर गाड़ी रुकने पर पलक ने फिर मिलने के आश्वासन के साथ हमें विदाई दी।

रास्ते पर कोई दिखता नहीं, मार्ग बताने वाला कौन? GPS को देख कर ही मुख्य मार्ग की तरफ़ हमारी कार दौड़ने लगी। बर्न की हल्की सी झलक ने अनेक प्रश्न खड़े किए। सड़कें इतनी साफ़ कैसे हैं, मार्ग में कोई थूकता नहीं है? पान, गुटका आदि जैसा कचरा भी नहीं दिख रहा। सिगरेट भी एक निर्धारित स्थान पर ही पी जा सकती है, जबकि कोई चौकीदार भी नहीं है। न ही कोई जमादार है, तो शहर को इतना सुंदर व साफ़ कौन, कैसे और क्यों रखता है? सब लोग अपनी ही साइड पर गाड़ी चलाते हैं। हाई-वे पर लिखी गई गति के आधार पर ही कार की स्पीड घटानी व बढ़ानी होती है। हमारी कार जब 130 की गति पर दौड़ रही थी, तो हमारे दिल की धड़कनें तेज हो गई, चुप रहना ही बेहतर था। हाई-वे किसी मंदिर के फ़र्श की मानिंद था। सरपट दौड़ती हुई कार हमें फ्रीबुर्ग शहर ले आई। फ्रीबुर्ग का भावार्थ है – आज़ाद दुर्ग।

हमें पता लगा कि स्विट्ज़रलैंड में राज्यों (कैंटॉन) की स्थानीय सरकार होती है। ये कैंटॉन अपने अपने शहरों की बहुत अच्छे से व्यवस्था बनाए रखते हैं। उनके अपने अपने क़ायदे-क़ानून हैं, हालाँकि कई दूसरे कैंटॉन्स से मिलते जुलते भी हैं। संघ राज्य (फेडेरल स्टेट)का यह मॉडल स्वायत्तता का अच्छा नमूना है। जो विदेशी नागरिक नए शहर में प्रवास करने जाता है, उसे सम्बंधित कैंटॉन में पृथक से पंजीकरण कराना होता है।

हमारे पास Schengen वीज़ा था, जिसके ज़रिए हम पूरे यूरोप में घूम सकते थे। यूरोपियन कम्युनिटी की यह व्यवस्था विशाल हृदय, खुले मस्तिष्क और लोकतंत्र को व्यवहार में उतारने जैसी लगी। फ्रीबुर्ग में रात्रि विश्राम और भोजन इत्यादि का देशी प्रबंध अदिति के घर पर ही था। मकान का हीटिंग सिस्टम हमारे लिए एकदम नया था। गैस के ज़रिए मकानों को गर्म रखा जाता है, ज़ाहिर है कि बाहर के वातावरण का घर के अंदर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। बाल्कनी और दरवाज़ों से बाहर की हरी-भारी वादियाँ, वर्षा की रिमझिम, दूर पहाड़ों पर बर्फ़, सब कुछ देखकर यात्रा की थकान मिट गई। क्रमश: प्रत्येक रविवार को जारी…


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