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IMG 20251213 223035 डॉ. टैस्सीटोरी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित Rajasthan News Portal साहित्य
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Thar पोस्ट न्यूज बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा इटालियन विद्वान राजस्थानी पुरोधा डॉ. लुईजि पिओ टैस्सीटोरी की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले दो दिवसीय ‘सिरजण उछब’ के प्रथम दिन आज प्रातः टैस्सीटोरी समाधि स्थल पुष्पांजलि-शब्दालि से प्रारभ हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि हमें हमारी मां, मातृभूमि एवं मातृभाषा के मान-सम्मान के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। हमारी मातृभाषा को शीघ्र मान्यता केन्द्र व राज्य सरकार को देनी चाहिए। रंगा ने कहा कि राजस्थानी को मान्यता मिलना ही डॉ टैस्सीटोरी को सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।
डॉ. फारूख चौहान ने कहा कि राजस्थानी भाषा भारतीय भाषाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ऐसी भाषा की अनदेखी करना दुःखद पहलू है। जाकिर अदीब ने कहा कि अब सरकारों को भाषा के प्रति अपना संवेदनशील एवं सकारात्मक व्यवहार रखते हुए भाषा की मान्यता पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। मधुरिमा सिंह ने कहा कि टैस्सीटोरी के महत्वूपर्ण कार्यो को जन-जन तक ले जाने का कार्य कमल रंगा ने किया है वह महत्वपूर्ण है। गोपाल कुमार कुंठित ,महेन्द्र जोशी, बुलाकी देवड़ा सौरभ कश्यप ,गंगाबिशन बिश्नोई, गिरिराज पारीक, भवानी सिंह, हरिनारायण आचार्य, अशोक शर्मा, कार्तिक मोदी, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, अख्तर अली, कन्हैयालाल, विष्णु देवड़ा, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, ओम प्रजापत, राहुल दाधीच, मानवेन्द्र सिंह, रजत राणा, प्रेमराज, चेतन कुमार, भैरूरतन, चेतन छाबड़ा सहित जिसमें राजस्थानी हेताळूओं ने अपनी श्रृद्धा सुमन अर्पित किए।

वेलि क्रिसन रुक्मणी री” और “छन्द राव जैतसी रो” नामक दो डिंगल भाषा के काव्यों का सम्पादन का बेहतरीन काम डाॅ. तैस्सितोरी ने किया : जोशी
/सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टिट्यूट बीकानेर के तत्वावधान में इटली मूल के राजस्थानी भाषा के विद्वान शोधार्थी डॉ. एल.पी.तैैस्सितोरी की जयंती के अवसर पर म्यूजियम परिसर स्थित एल.पी. तैैस्सितोरी की प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि एवं उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डूंगर महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ.राजेन्द्र पुरोहित थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने की एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सखा संगम के अध्यक्ष एन.डी.रंगा, पूर्व प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डाॅ.सीताराम गोठवाल
एवं व्यंगकार-सम्पादक डाॅ.अजय जोशी थें ।कार्यक्रम संयोजक साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने बताया कि कार्यक्रम में सैकड़ों शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य जनों ने अतिथियों के साथ डॉ.तैस्सितोरी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि हमें डॉ. तैस्सितोरी से प्रेरणा लेनी चाहिए जिस तरीके से उन्होंने राजस्थानी भाषा और यहां की संस्कृति के लिए उल्लेखनीय काम किया, यहां रहकर उन्होंने अथक परिश्रम उत्साह व लगन के साथ यहां की भाषा को पढ़ना व लिखना सीखा। उन्होंने चारणी साहित्य का अवलोकन तथा अन्य अनेकानेक ग्रंथों का संपादन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. राजेन्द्र पुरोहित ने कहा की डॉ.तैस्सितोरी ने तुलसी कृत रामचरितमानस और बाल्मीकि रामायण का तुलनात्मक अध्ययन विषय पर फ्लोरेंस विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. गोठवाल ने कहा कि डॉ. तैस्सितोरी का लक्ष्य राजस्थानी के अलभ्य और अमूल्य ग्रंथों की खोज और सर्वेक्षण रहा था। डॉ व्यास ने कहा कि वह आचार्य सूरिजी को गुरुतुल्य मानते थे। डॉ. तैस्सितोरी जैन धर्म और साहित्य से विशेष रूप से प्रभावित थे। कथाकार अशफाक कादरी ने कहा कि उन्होंने अनेक राजस्थानी ग्रंथों का संपादन किया। नए सिरे से खोज की और इतिहासकारों को नई दृष्टि प्रदान की।
कार्यक्रम में बोलते हुए साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि तैस्सितोरी ने अनेक ऐसे कार्य किए जिन पर तत्कालीन विद्वानों का बहुत कम ध्यान गया था उन्होंने “जूनी राजस्थानी” लिखकर राजस्थानी व्याकरण की आधारशिला रखी ।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में एन.डी. रंगा कवि रवि पुरोहित, पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा , प्रोफेसर नरसिंह बिन्नाणी, जगदीश बारहठ, शायर अब्दुल शकूर सिसोदिया, पत्रकार रमेश महर्षि , रंगकर्मी बी.एल.नवीन, युवा शोधार्थी डाॅ.नमामी शंकरआचार्य , आशा शर्मा, संगीता झा, मुनीन्द्र अग्निहोत्री सहित अनेक लोगों ने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की कार्यक्रम के अंत में महेन्द्र जोशी ने आभार प्रकट किया


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