






Thar पोस्ट। एक महिला 117 वर्ष की उम्र में भी खुद को उत्साहित ऊर्जा से भरपूर महसूस करती है।अल्बानिया की कामिले मारा की मुस्कान और जीवन के प्रति उत्साह लोगों को हैरान कर देता हैअल्बानिया के एक छोटे से गांव फेरास में रहने वाली मारा इन दिनों दुनिया की सबसे बुजुर्ग महिला होने की संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उनका जन्म 19 अगस्त 1909 को हुआ था. उस दौर में जन्मी मारा ने ओटोमन शासन, द्वितीय विश्व युद्ध और अल्बानिया की कम्युनिस्ट व्यवस्था, महामारियां जैसे कई ऐतिहासिक दौर देखे हैं, लेकिन आज भी उनका ध्यान केवल खुशहाल जीवन जीने पर फोकस है। कामिले मारा को इस बात की विशेष चिंता नहीं है कि उन्हें दुनिया की सबसे बुजुर्ग महिला माना जाएगा या नहीं. यहां तक कि उन्हें यह साबित करने की भी फिक्र नहीं कि वह अब भी जीवित हैं. अपने घर के बाहर बैठी मारा ने कहा कि जीवन बेहद सुंदर है. उन्होंने जीवन की तुलना अल्बानिया की प्रसिद्ध टॉमोर पर्वतमाला से करते हुए कहा कि खिलते हुए पहाड़ों की तरह जीवन भी खूबसूरत है।












मारा के परिवार के पास उनकी उम्र से जुड़े कई आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं. इनमें 1945 का जन्म प्रमाण पत्र, 1978 में जारी पासपोर्ट और हाल ही में जारी पहचान पत्र शामिल हैं. सभी में उनकी जन्मतिथि 19 अगस्त 1909 दर्ज है. यदि यह आयु आधिकारिक तौर पर मान्य हो जाती है, तो वह वर्तमान में दुनिया की सबसे बुजुर्ग जीवित महिला मानी जाने वाली ब्रिटेन की एथेल कैटरहम से दो दिन बड़ी होंगी.
बन्द पेंशन फिर से शुरू
यह भी दिलचस्प है कि मारा की उम्र को लेकर स्थानीय प्रशासन भी एक बार हैरान रह गया था. उनके 80 वर्षीय बेटे हिसेन के अनुसार, जब उनकी मां 100 वर्ष की हुईं तो अधिकारियों ने उनकी पेंशन बंद कर दी थी क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि वह अब भी जीवित हैं. परिवार को गवाहों और अन्य प्रमाणों के जरिए यह साबित करना पड़ा कि मारा जीवित हैं, जिसके बाद पेंशन दोबारा शुरू की गई. इसी महीने सरकार ने उनकी उम्र को सम्मान देते हुए विशेष सरकारी पेंशन भी मंजूर की है.
गजब की लाइफ कामिले मारा की दिनचर्या आज भी काफी सक्रिय है. वह सुबह जल्दी उठती हैं, आंगन साफ करती हैं, फूलों में पानी डालती हैं और मुर्गियों को दाना खिलाती हैं. इसके बाद वह आराम से कॉफी पीती हैं. वह अपने बेटे के साथ बगीचे में टहलना भी पसंद करती हैं. रास्ते में अनार तोड़ना और जेब में तुलसी की पत्तियां रखकर उसकी खुशबू महसूस करना उनकी आदत में शामिल है. उनके बेटे का दावा है कि उनकी मां कभी डॉक्टर के पास तक नहीं गईं और उन्होंने जीवन में कोई दवा भी नहीं ली।
कामिले मारा के पति का 36 वर्ष पहले निधन हो चुका है. वह आज भी अपने वैवाहिक जीवन को प्यार से याद करती हैं. उनका विवाह पारंपरिक तरीके से हुआ था, लेकिन वह इसे खुशहाल रिश्ता बताती हैं. सात बच्चों की मां मारा आज अपने परिवार की पांच पीढ़ियों को देख चुकी हैं. परिवार और दोस्तों को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं, लेकिन जब घर में बच्चों और रिश्तेदारों की चहल-पहल देखती हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आती है।
