


Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद राजनीति अंदरखाने सुलग रही है। शहरों की सियासत में अब बोर्ड बनाने के लिए जरूरी संख्या जुटाने और उसे मतदान तक अपने खेमे में बनाए रखने का है। इसके लिए दोनों दलों द्वारा सभी पैंतरे आजमाए जा रहे हैं। इसके बाद भी एक दूसरे के खेमों में सेंधमारी हो रही है। पुलिस की छापेमारी से लेकर अन्य तमाम तरीके अपनाए जा रहे हैं। राजस्थान में कई जगह पार्षदों के अपरहण के आरोप तक लग रहे हैं। कांग्रेस इन घटनाओं को पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश बता रही है। भाजपा की ओर से अलग-अलग मामलों में इन आरोपों को खारिज किया गया है और पुलिस कह रही है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस शहर में बोर्ड किसका बनेगा, बल्कि यह भी है कि 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष-मेयर चुनाव तक राजनीतिक खेमों में क्या-क्या बदलाव होते हैं। बीकानेर में महापौर पद के लिए नामांकन भरे गए है। इस बीच पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई है।

झुंझुनूं के मलसीसर में चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस पार्षदों की बाड़ाबंदी वाले होटल में पुलिस पहुंचने से सियासी विवाद खड़ा हो गया। 16 सितंबर को 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम ने होटल के कमरों की तलाशी ली। होटल में कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद ठहरे हुए थे। झुंझुनूं ग्रामीण डीएसपी नरेंद्र सिंह ने राजनीतिक दबाव से इनकार किया। उनके मुताबिक मलसीसर एसडीएम के सर्च वारंट के आधार पर होटल की तलाशी ली गई। पुलिस के अनुसार एक पार्षद के परिजनों ने उसे बंधक बनाए जाने की शिकायत की थी। जिस पार्षद की तलाश में पुलिस पहुंची थी, वह होटल में नहीं मिला और किसी पार्षद को हिरासत में नहीं लिया गया कांग्रेस ने सीकर के धोद और लोसल तथा टोंक जिले की दूनी नगरपालिका में भी अपने और समर्थित पार्षदों पर पुलिस के जरिए दबाव बनाने, डराने या उन्हें ले जाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। दूनी में कांग्रेस ने अपनी अध्यक्ष प्रत्याशी और निर्वाचित पार्षदों को पुलिस के जरिए परेशान किए जाने का आरोप लगाया है।
टोंक जिले की देवली-उनियारा की दूनी नगरपालिका में कांग्रेस की अध्यक्ष प्रत्याशी और निर्वाचित पार्षदों को पुलिस के दम पर डराने, धमकाने और जबरन उठाने का एक और मामला सामने आया। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी ने पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मुझे परेशान किया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी। कांग्रेस की तरफ से यह वीडियो सोशल मीडिया हेंडल पर भी डाला गया है।
श्रीगंगानगर नगर परिषद में 65 वार्ड हैं। उपलब्ध चुनाव परिणाम के अनुसार भाजपा के 30, कांग्रेस के 17 और निर्दलीय 18 पार्षद हैं। भाजपा सबसे बड़ा दल है, लेकिन अध्यक्ष बनाने के लिए निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी बीच भाजपा पार्षद संजय मूंदड़ा ने अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय नामांकन दाखिल किया और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
