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IMG 20241023 101608 7 उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर यह है विवाद, 636 साल पुरानी है मस्जिद Rajasthan News Portal देश
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Thar पोस्ट न्यूज। उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 को लेकर सड़क 15 मीटर चौड़ी होगी, उसकी जद में आ रहे शाही मस्जिद का पहला हिस्सा 3.5 फीट और दूसरा हिस्सा 8 फीट गिरेगा, बाकी मस्जिद सुरक्षित रहेगी। बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा और मस्जिद से लगे दुकानों के लिए दूसरी जगह दी जाएगी। समझौते के तहत मुस्लिम समाज के लोग खुद ही मस्जिद का हिस्सा गिराने के लिए तैयार हैं। कल मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की है, 15 उपद्रवी गिरफ़्तार किए गए हैं। इसके साथ ही पांच सोशल मीडिया एकाउंट पर भी केस दर्ज कराए गए हैं और 100 से ज़्यादा कंटेंट हटाए गए हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर को उज्जैन के शाही मस्जिद मामले में दायर याचिका खारिज कर दी थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने व्यापक लोक हित, जन सुरक्षा और सिंहस्थ यातायात प्रबंधन को सर्वोपरि मानते हुए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को हरी झंडी दे दी थी।

कोर्ट ने जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले को डिस्पोज ऑफ कर दिया। कमेटी और प्रशासन के बीच समझौते के तहत सड़क के लिए 3 फीट जगह के साथ कुछ दुकानें हटाने पर सहमति बनी ।

उज्जैन में रविवार (27 सितंबर 2026) की रात हुई मीटिंग में मस्जिद के हिस्से को मुस्लिम पक्ष खुद गिराने पर सहमत हो गया था। सोमवार की सुबह तक शांति थी और शहर की शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को मस्जिद कमेटी के लोग खुद तोड़ रहे थे। लेकिन तभी एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया गया, जिसमें दावा किया गया कि जामा मस्जिद को प्रशासन पूरी तरह ध्वस्त करना चाहता है और बुलडोजर भी पहुंच चुके हैं। ऐसी अफवाह फैलते ही मस्जिद के आसपास हजारों की भीड़ जुट गई और भीड़ ने आगे बढ़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने भीड़ को रोका तो लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हो गए।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मस्जिद एक प्राचीन धार्मिक इमारत है और प्रेयर हॉल, मीनार और दूसरी संरचनाओं के हिस्सों को हटाने से उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सड़क की ज़रूरी चौड़ाई पाने के लिए मस्जिद के पास मौजूद दूसरी संपत्तियों को हटाया जा सकता है। मस्जिद प्रबंधन ने तर्क दिया कि अधिकारियों को मस्जिद को छुए बिना सड़क के दूसरी तरफ के ढांचों को हटाने या किसी दूसरे रास्ते (अलाइनमेंट) पर विचार करना चाहिए।

नगर निगम के नक्शे और पैमाइश के अनुसार, शाही मस्जिद का अगला हिस्सा (लगभग 9 से 11 फीट चौड़ा भाग) इस 15 मीटर की सड़क की जद (अलाइनमेंट) में आ रहा था। मस्जिद प्रबंधन के अनुसार, इस कार्रवाई से उनके प्रार्थना कक्ष (जमात खाना), परिसर के मजहर चौक और लगभग 120 फीट ऊंची मीनार का हिस्सा प्रभावित हो रहा है। 
मस्जिद के इमाम और वक्फ प्रबंधन के अनुसार, यह मस्जिद वर्ष 1390 ईस्वी में बनी थी, जिससे इसका इतिहास लगभग 636 साल पुराना (14वीं शताब्दी के अंत का) हो जाता है। इस मस्जिद के 636 साल पुराने होने का दावा मुख्य रूप से मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने किया है। 


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