






Thar पोस्ट न्यूज। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर कारोबारियों से MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वसूले जाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।












आखिर MDR क्या है?
देश के कारोबारियों से 2000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर MDR चार्ज वसूले जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। वकील अंजन दत्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कारोबारियों से वसूला जाने वाला एमडीआर कोई फीस है, टैक्स है या कुछ और है?
नोटिस जारी किया
कोर्ट में अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई याचिका में इस संबंध में 14 दिसंबर को जारी की गई अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी किए गए MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार के ये फैसला लिया है। इस पूरे मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी किया है।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने मर्चेंट को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर को मंजूरी दे दी थी। 2000 रुपये तक के सभी तरह के यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह से फ्री रहेंगे। इसके अलावा, दो व्यक्तियों के सामान्य यूपीआई अकाउंट के बीच होने वाला ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह से फ्री होगा। सरकार ने अभी हाल ही में साफ किया था कि MDR टैक्स नहीं है। ये एक फीस है, जिसे बैंकों और यूपीआई प्लेटफॉर्म्स के बीच बांटा जाएगा। ये नया सिस्टम 15 अक्टूबर से लागू होना है।
