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IMG 20241023 101608 2 UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने का विरोध Rajasthan News Portal देश
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Thar पोस्ट। देशभर में UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने पर विरोध के स्वर मुखर होने लगे है। राजस्थान में व्यापारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल और फोर्टी ने सरकार के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से लेने की बात न हो, लेकिन कारोबार की लागत बढ़ने पर इसका असर आखिरकार उपभोक्ता पर पड़ सकता है। व्यापारी संगठनों को आशंका है कि बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को लागू करने से पहले UPI स्टीयरिंग कमेटी के स्तर पर पुनर्विचार कराने की मांग की है।

फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (FORTI) के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार का यह कहना कि MDR का भार ग्राहक पर नहीं पड़ेगा, व्यावहारिक रूप से पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार व्यापारी पर आने वाली अतिरिक्त लागत अंततः वस्तु या सेवा की कीमत में शामिल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे कैश ट्रांजैक्शन बढ़ने की आशंका है। यूटिलिटी और स्टॉक मार्केट से जुड़े भुगतानों पर भी MDR को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। अग्रवाल ने बताया कि संगठन ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर व्यवस्था वापस लेने की मांग की है।

FORTI के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने कहा कि इसका असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा। उनका दावा है कि अतिरिक्त लागत का भार अंततः एंड यूजर तक पहुंच सकता है।

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का दावा है कि MDR व्यवस्था से करीब पांच करोड़ छोटे कारोबारी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें फल-सब्जी विक्रेता, दवा दुकानदार, पानी और कोल्ड ड्रिंक विक्रेता, जूते-चप्पल, प्लास्टिक सामान, खिलौने, कटलरी, स्कूल ड्रेस, कॉस्मेटिक और अन्य छोटे कारोबार करने वाले शामिल हैं।

व्यापारी संगठन का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए मार्जिन पहले ही सीमित है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आने से उनके कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और विवाद की स्थिति भी बन सकती है। अगर UPI भुगतान पर कारोबारियों की लागत बढ़ती है तो छोटे दुकानदारों के सामने परेशानी खड़ी होगी। ऐसी स्थिति में वे दुकान पर ‘UPI बंद’ का बोर्ड लगाने को मजबूर होंगे।


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