





Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में पानी के लिए अनेक गांव आमने सामने है। करौली जिले के पांचना बांध के पानी को लेकर गुर्जर और मीणा समुदाय के बीच चल रहा विवाद अभी सुलझता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ की गई दो दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। अब 28 जून के बाद आंदोलन तेज होने और रेल-रोको जैसे कार्यक्रमों की चेतावनी दी गई है। इस बारे में भरतपुर संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया ने बताया कि प्रशासन लगातार दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है। करौली और सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टरों को भी स्थानीय लोगों से संवाद कर समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को एक ओर राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करनी है, वहीं दूसरी ओर शांति और कानून व्यवस्था भी बनाए रखनी है।पांचना बांध विवाद को लेकर गुरुवार और शुक्रवार को भरतपुर संभागीय आयुक्त कार्यालय में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी तरफ सवाई माधोपुर के खंडीप गांव में धरने का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा ने आरोप लगाया कि बांध पर कुछ लोगों ने कब्जा जैसा माहौल बना रखा है और वे नहरों में पानी छोड़ने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांध सरकारी संपत्ति है, ऐसे में किसी को पानी रोकने का अधिकार नहीं है। विवाद की जड़ पांचना बांध के पानी के वितरण को लेकर है।
विवाद व तनातनी : करौली जिले के बांध के आसपास बसे 39 गांव चाहते हैं कि पहले उन्हें सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए। वहीं सवाई माधोपुर जिले के कमांड एरिया के 35 गांवों की मांग है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तुरंत नहरों में पानी छोड़ा जाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पानी नहीं मिलने से करीब 9,985 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो रही है और किसानों को पिछले दो दशकों में लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।