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Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में भी चीतों को बसाने की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान के रावतभाटा और मध्य प्रदेश के गांधी सागर डैम के नजदीकी जंगलों में जल्द ही चीतों की दहाड़ सुनाई दे सकती है।

इस इलाके को चीतों के नए आशियाने के रूप में विकसित करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसके लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाई है, जिसने इस पूरे क्षेत्र को ‘मेटा पापुलेशन साइट’ के रूप में जांचने के लिए बुधवार से जमीनी सर्वे शुरू कर दिया है. यह सर्वे रावतभाटा क्षेत्र की पारिस्थितिकीय उपयुक्तता, लैंडस्केप कनेक्टिविटी और भविष्य में चीता बसाने की संभावनाओं के लिए यह मूल्यांकन के लिए किया जा रहा है। विशेष सर्वे टीम में एनटीसीए के आला अधिकारियों के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ वन अधिकारी शामिल हैं. कोटा के मुख्य वन संरक्षक (CCF वाइल्डलाइफ) सुगनाराम जाट के अनुसार नए वन्यजीव को बसाने से पहले वहां के माहौल, पानी और शिकार की उपलब्धता की जांच जरूरी होती है, ताकि बाहर से यहां पर वन्य जीव को लाकर संरक्षित किया जा सके. मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर और मुख्य वन संरक्षक वाइल्डलाइफ कोटा सुगनाराम जाट ने बताया कि एनटीसीएनए रावतभाटा क्षेत्र चीता पुनर्स्थापना के लिए चिन्हित की हुई है।

एनटीसीए की 28वीं बैठक में लिए गए निर्णय के बाद रावतभाटा क्षेत्र में मेटा पापुलेशन साइट के रूप में मूल्यांकन किया जाना था। टीम ने गांधी सागर की ओर प्रस्थान किया. समिति ने चित्तौड़गढ़ प्रादेशिक वन मंडल के रावतभाटा रेंज अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र का निरीक्षण किया. यह राणा प्रताप सागर बांध के ईस्ट साइड में है. लगभग 299 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह भू-भाग प्राकृतिक रूप से पूर्व दिशा में स्थित पर्वतीय श्रेणियों से संरक्षित है. इसके उत्तरी भाग में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और दक्षिण दिशा में मध्यप्रदेश का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य स्थित है, जिससे यह क्षेत्र एक इंपॉर्टेंट सिनेरियो से कनेक्ट करता है.

निरीक्षण के दौरान समिति ने राणा प्रताप सागर बांध क्षेत्र, गॉर्ज क्षेत्र व आसपास के वन क्षेत्रों का अवलोकन किया. इसमें क्षेत्र की वनस्पति, मृदा संरचना, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, जैविक दबाव व अन्य पारिस्थितिकीय कारकों का आकलन किया गया. यह सब चीता पुनर्स्थापन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।


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