





Thar पोस्ट न्यूज। युद्ध के चलते बदले हालातों के बीच सरकार ने बुधवार को संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को स्थिति की जानकारी देना और एक साझा रणनीति पर चर्चा करना था। कांग्रेस की ओर से तारिक अहमद और मुकुल वासनिक शामिल हुए हैं, जबकि जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा बैठक में पहुंचे, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया के संकट पर विस्तार से जानकारी दी।





तृणमूल कांग्रेस ने सर्व दलों की बैठक से दूरी बनाई और राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए । बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हुई , ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक असर और कूटनीतिक रणनीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विचार-विमर्श हुआ। मंथन के बाद जो मुख्य बाते छनकर आई उनमें
- बैठक से पहले पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष भारत की ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई और सप्लाई चेन पर लंबे समय तक असर डाल सकता है, इसलिए देश को हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा।
- सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। तेल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
- सरकार ने बताया कि चार और जहाज भारत की ओर आ रहे हैं और कुछ अन्य जहाज जल्द ही होर्मुज क्षेत्र से निकलेंगे। इससे साफ है कि सप्लाई चेन को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं है।
- बैठक में सरकार ने विपक्ष को मौजूदा हालात की पूरी जानकारी दी और उनके सवालों का जवाब भी दिया। विपक्ष ने सुरक्षा, तेल आपूर्ति और विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए, जिन पर सरकार ने भरोसा दिलाया कि सभी पहलुओं पर नजर रखी जा रही है।
- सरकार ने साफ कहा कि वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे। साथ ही आम लोगों से अपील की गई कि वे किसी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और घबराएं नहीं। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा और मांग की कि सिर्फ बैठक नहीं बल्कि संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए। वहीं राहुल गांधी ने बैठक में शामिल न होने का फैसला लिया और सरकार की विदेश नीति की आलोचना की।
- साथ ही कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार के ईरान के साथ संबंधों और एलपीजी संकट को लेकर सवाल उठाए, जबकि सत्तापक्ष ने इस समय राष्ट्रीय एकता की जरूरत पर जोर दिया।