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IMG 20251227 WA0019 तम से क्या घबराना सूरज रोज निकलता है-आचार्य कुलदीप Rajasthan News Portal धर्म
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Thar पोस्ट न्यूज। श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन आचार्य कुलदीप ने बताया कि श्री कृष्णा के संदेश अनुसार व्यक्ति को अपने बालक बालिकाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि करनी चाहिए तथा युवाओं को जीवन में आत्मनिर्भर बनाना चाहिए, उन्हें जीवन के संघर्षों से परिचित करवाया जाना आवश्यक है। धर्म का साथ देना सिखाया जाए न कि धर्म का विरोध करना। उत्तराधिकार जन्म से प्राप्त नहीं होना चाहिए। योग्य एवं सामर्थ्यवान को ही उत्तराधिकारी बनाना चाहिए, उसे तैयार करना पड़ता है, सीखना पड़ता है, योग्य बनाना पड़ता है। मौन, ऊर्जा संरक्षण का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। श्रीमद् भागवत गीता मुख्यतः दो व्यक्तियों का संवाद है परंतु इसमें कुल 6 व्यक्तियों के कथना है। गुरु अपने विद्यार्थी में जो गुण देखना चाहते है वह स्वयं गुरु में निहित होने जरूरी है अन्यथा उनके हस्तांतरण शिष्य में संभव नहीं है।
आचार्य कुलदीप ने अपने संगीतमय प्रस्तुति में गुड़ाकेश एवं ऋषिकेश के अर्थ को स्पष्ट करते हुए बताया कि गुड़ाकेश का अर्थ है अपनी निद्रा पर विजय प्राप्त करने वाला अर्थात अर्जुन तथा ऋषिकेश का अर्थ है समस्त वेदों का ज्ञाता अर्थात श्री कृष्णा। आचार्य कुलदीप ने कहा कि यदि कोई जागते हुए भी सो रहा है तो वह सोता नहीं तमोगुण में डूबा है कि उसे जागृत नहीं किया जा सकता।
आचार्य रवि शंकर जी ने कहा कृष्ण की विशेषताओं अपनाए बिना व्यक्ति अपने जीवन में सफलता को प्राप्त नहीं हो सकता है अधिकतर झगड़ों की जड़ वाणी है। जहां तक हो सके अपने दिमाग, आंखों, कान को खुला रखिए तथा मुंह को बंद रखिए अर्थात अच्छा श्रोता, दर्शक या विचारक बनिए। मधुर भजन एवं संगीत पर उपस्थित दर्शको ने तालियां बजाकर अपने भाव प्रकट किए।
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