




Thar पोस्ट न्यूज बीकानेर। राजस्थान में गीत संगीत की परंपरा सैंकड़ों साल पुरानी है। त्योहारों पर गाए जाने वाले लोक गीतों का खास महत्व और अहमियत है और इन्ही गीतों से फिजां में त्योहारी व मांगलिक आनंद घुलता है। बदलते परिवेश में हमारी विरासत और परम्परा को जिंदा रखना मुश्किल होता जा रहा है। जिस संस्कृति, लोक गीतों व कला को देखने व इसमे जीने के लिए देश विदेश से लोग खींचे चले आते हैं वह रह पाएगी या नहीं ? यह कहना मुश्किल है। लेकिन बीकानेर की कवियत्री गीतकार गायिका श्रीमती अरुणा सोनी एक नई उम्मीद है।




बीकानेर की अनूठी परम्परा
बीकानेर की श्रीमती अरुणा सोनी पत्नी श्री टीकम चंद सोनी अपने सुरीले स्वर से राजस्थान की इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। इस बारे में सुनारों की बड़ी गवाड़ में निवास करने वाली सोनी ने बताया कि राजस्थान में लोकगीतों की परंपरा सैंकड़ों सालों से है। इन्हें फिर से जीवंतता देने के अलावा सभी प्रकार के गीतों की अनेक रचनाएं की गई है जिसमें विवाह शादी से लेकर होली, दिवाली एवं गणगौर तक के गीतों और लोकगीतों को अपने शब्दों और वाणी में पिरोया है, और अलग-अलग पुस्तकों में छपवा कर इस कला को समर्पित करते हुए अपना अमूल्य योगदान दिया है।

श्रीमती अरुणा सोनी का गीत संगीत एवं भजनों का एक अपना समूह है जो समय-समय पर अपनी प्रस्तुतियां देते रहते हैं इसी संदर्भ में इन्होंने अपना एक यूट्यूब चैनल
“संस्कृति around us”भी बनाया हुआ है जिस पर जाकर आप इनके द्वारा स्वरचित और पारंपरिक गीतों लोक गीतों का आनंद ले सकतें है।
होली पर मस्ती भरे गीत, दिवाली पर प्रभु श्री राम सीता एवं लक्ष्मी माता के गीत, भैया दूज के गीत, गणगौर पर्व पर भगवान शिव-पार्वती के रूप में गवरजा-ईश्वर को समर्पित गीतों व वैवाहिक गीतों का अनूठा संग्रह है।

