

Thar पोस्ट न्यूज। विश्व में अल नीनो का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि 2026 का अल नीनो 1950 के बाद देखी गई सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल हो सकता है। इसका असर सिर्फ तापमान पर नहीं पड़ेगा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में बारिश, सूखा और बाढ़ का पैटर्न भी बदल सकता है। अल नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। यानी आने वाले महीनों में इसका प्रभाव कम होने के बजाय कई क्षेत्रों में और महसूस किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि पहले से बढ़ रहे मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के साथ अल नीनो का असर जुड़ रहा है।










WMO के मुताबिक, 2026 के आखिरी महीनों में दुनिया के बड़े हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर रहने की बहुत ज्यादा संभावना है। अल नीनो के केंद्र माने जाने वाले मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अक्टूबर से दिसंबर के बीच तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस यानी करीब 6.7 डिग्री फॉरेनहाइट तक अधिक हो सकता है।
अल नीनो, अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन यानी ENSO नाम के प्राकृतिक जलवायु चक्र का गर्म चरण है। यह प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव से जुड़ा होता है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। यह घटना आमतौर पर हर 2 से 7 साल में देखने को मिलती है। शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं ने पिछले महीने अनुमान लगाया था कि इस साल का ‘सुपर अल नीनो’ दुनिया भर में बड़ी संख्या में अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है। उनके मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच इससे 4,51,000 तक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यह अनुमान अल नीनो से जुड़ी अत्यधिक गर्मी और मौसम में होने वाले बड़े बदलावों के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को ध्यान में रखता है।
