





Thar पोस्ट न्यूज। बात करते है उस दौर की जब बीकानेर के शहर से लेकर गांव ठाणी में लकड़ी के चूल्हे में भोजन तैयार होता था। भोजन में महिला या बनाने वाले का त्याग प्रेम छिपा था। भोजन तेज आंच में पकता था और जायकेदार होता था। चूल्हे व अग्नि धुंए की वजह से घरों में गरमाहट रहती था। हालांकि चूल्हे पर तैयार भोजन को अब हेरिटेज स्टाइल में माना जाने लगा है। लकड़ी के चूल्हे के साथ ही समय बदला और केरोसिन तेल का चलन बढ़ने लगा। केरोसिन की आपूर्ति चौक, गली मोहल्लों में विक्रेताओं द्वारा लोहे के बड़े ड्रम द्वारा हुआ करती थी। घरों में लोग 5 लीटर या 10 लीटर के लोहे के लंबे डिब्बे में संग्रहित करते थे। उसे फिर स्टोव में कीप के माध्यम से डाला जाता था। लेकिन बीकानेर में 1985 के बाद फिर अचानक समय बदला। आयु मेरी बहुत कम थी तब मैंने केरोसिन स्टोव की पीली ज्वाला के स्थान पर पहली बार नीली अग्नि देखी। घरों में शुरू हुआ गैस सिलैंडर का दौर। हालांकि शुरू में गैस सिलैंडर के लिए भी लाइन लगती थी। किल्लत भी रहती थी। खैर, बीकानेर में अब एक बार फिर इतिहास बन रहा है। भोजन तैयार करने के दौर में बदलाव आ रहा है। बीकानेर में पाइपलाइन से रसोई गैस (PNG) की सुविधा शुरू होने जा रही है। गैसोनॉट कंपनी की ओर से पहले चरण में समता नगर, गांधी नगर और करणी नगर में करीब 20 किलोमीटर लंबी गैस पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। इन कॉलोनियों के 139 घरों ने रजिस्ट्रेशन कर लिया है और दिसंबर 2025 के अंत तक इन घरों में पाइपलाइन गैस की सप्लाई शुरू होने की उम्मीद है।





गैसोनॉट कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर गंगा प्रसाद बरुआ के अनुसार, पहले चरण में करीब 200 किमी पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है। रीको के करणी नगर औद्योगिक क्षेत्र में गैस स्टेशन तैयार हो चुका है और वहां से ही सप्लाई संचालित की जाएगी।